सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आकृति चौधरी की हिरासत रद्द करने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में रखने के लिए अपने वेतन से पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने चौधरी की हिरासत रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक
न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रूपम की याचिका पर नोटिस जारी किया और चौधरी की हिरासत को रद्द करने के उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर ये अंतरिम आदेश पारित किए। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पीठ ने जिलाधिकारी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनीं।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के अमल पर लगाई रोक
इसके बाद अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से हो रही सुनवाई की आवाज बंद कर दी। अदालत ने आदेश दिया, सभी पक्षों के वरिष्ठ वकीलों को सुनने के बाद इस अदालत की राय है कि जब तक मामले की गुण-दोषों के आधार पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक फैसले के अमल पर विशेष रूप से पैरा नंबर 27 से 33 तक रोक रहेगी। उच्च न्यायालय ने दो सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास की स्नातक 25 वर्षीय आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द कर दिया था, जिसे अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।
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