बिना नोटिस पुलिस किसी को पूछताछ के लिए थाने नहीं बुला सकती : हाईकोर्ट
प्रयागराज। Allahabad High Court ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि पुलिस किसी अपराध के शक में किसी संभावित आरोपी या व्यक्ति को बिना नोटिस अपराध की विवेचना के लिए थाने नहीं बुला सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूछताछ या जांच के लिए बुलाने से पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
मौखिक आदेश पर थाने बुलाना गलत
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति राजीव मिश्र और न्यायमूर्ति पद्म नारायण मिश्र की खंडपीठ ने ज्ञानमती व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी नागरिक के जीवन, स्वतंत्रता और सम्मान को पुलिस के मौखिक आदेशों के आधार पर खतरे में नहीं डाला जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी भी व्यक्ति या संभावित आरोपी को अपराध की जांच या पूछताछ के लिए मौखिक आदेश देकर अथवा बिना लिखित नोटिस के थाने नहीं बुला सकती।
कोर्ट ने बताए महत्वपूर्ण नियम
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच के लिए बुलाने से पहले पुलिस को लिखित नोटिस देना जरूरी है। किसी व्यक्ति को मौखिक रूप से बुलाना या मनमाने तरीके से थाने में बैठाए रखना कानून के खिलाफ माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज हुए बिना किसी व्यक्ति को थाने नहीं बुलाया जा सकता। साथ ही सब-इंस्पेक्टर या अन्य अधीनस्थ पुलिसकर्मी थाना प्रभारी (SHO) की पूर्व अनुमति के बिना किसी को पूछताछ के लिए नहीं बुला सकते।
महराजगंज के मामले पर सुनवाई
दरअसल यह मामला महराजगंज जिले के सोनौली थाने से जुड़ा है, जहां याची के बेटे के खिलाफ लड़की भगाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि याची का नाम एफआईआर में नहीं है, इसके बावजूद पुलिस उन्हें बार-बार थाने बुलाकर परेशान और धमका रही है। इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया गया।
हाईकोर्ट ने पुलिस को दिए निर्देश
Allahabad High Court ने मामले में निर्देश दिया कि बिना विधिक नोटिस दिए पुलिस याची को पूछताछ के लिए थाने न बुलाए।
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