हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपीलीय प्राधिकारी क

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का निर्देश: चंबा पंचायत चुनाव विवाद पर 10 सप्ताह के भीतर लें निर्णय

Himachal Pradesh High Court

शिमला (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपीलीय प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि वह 10 सप्ताह के भीतर यह तय करे कि चंबा जिले में ग्राम पंचायत प्रधान के चुनाव को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका निर्धारित समय सीमा के बाद दायर की गई थी या नहीं।

अधिकतम 10 सप्ताह के भीतर, निर्णय लेने का निर्देश

न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने संतोष कुमारी द्वारा दायर एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए चंबा के उपायुक्त को दोनों पक्षों की सुनवाई करने और समय सीमा संबंधी कानूनी मुद्दे पर शीघ्रता से, अधिकतम 10 सप्ताह के भीतर, निर्णय लेने का निर्देश दिया। यह विवाद चंबा जिले की सलोनी तहसील की ग्राम पंचायत ठकरीमट्टी के प्रधान के चुनाव से संबंधित है, जो 26 मई, 2021 को हुआ था। संतोष कुमारी को 597 वोट प्राप्त हुए और उन्हें निर्वाचित घोषित किया गया, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी, प्रतिवादी संख्या 10 को 561 वोट मिले।

संतोष कुमारी का चुनाव रद्द

असफल उम्मीदवार ने बाद में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1944 के तहत सलोनी के उप-विभागीय अधिकारी (सिविल) के समक्ष चुनाव को चुनौती दी। प्राधिकारी ने चुनाव याचिका को स्वीकार करते हुए संतोष कुमारी के चुनाव को रद्द कर दिया और प्रतिवादी को विजेता घोषित किया। इस आदेश से असंतुष्ट होकर संतोष कुमारी ने चंबा के उपायुक्त के समक्ष अपील दायर की। यद्यपि अपीलीय प्राधिकारी ने एसडीएम द्वारा पारित आदेश पर रोक लगा दी, तथापि संतोष कुमारी को प्रधान के पद पर बने रहने देने के बजाय पंचायत के कामकाज के लिए उप-प्रधान नियुक्त कर दिया।

याचिका 8 जुलाई, 2021 को निर्धारित समय सीमा के बाद दायर

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुश दास सूद ने तर्क दिया कि हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 163 और 165 के अंतर्गत चुनाव याचिका दायर करने की समय सीमा 30 दिन निर्धारित है। उन्होंने बताया कि चुनाव परिणाम 26 मई, 2021 को घोषित किया गया था, जबकि याचिका 8 जुलाई, 2021 को निर्धारित समय सीमा के बाद दायर की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि चुनाव याचिका समय सीमा के कारण अस्वीकृत हो गई थी और संबंधित प्राधिकारी के पास विलंब को क्षमा करने का अधिकार क्षेत्र नहीं था।

सक्षम प्राधिकारी को इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए

उच्च न्यायालय ने पाया कि समय सीमा के प्रश्न की जांच प्रारंभिक चरण में ही की जानी आवश्यक है। न्यायिक मिसालों का हवाला देते हुए, अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यदि कोई चुनाव याचिका निर्धारित समय सीमा के बाद दायर की जाती है, तो सक्षम प्राधिकारी को इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि याचिका खारिज करने योग्य है या नहीं, भले ही प्रारंभिक चरण में आपत्ति न उठाई गई हो।

मुद्दे को अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय के लिए छोड़ा

चुनाव विवाद के गुण-दोषों में जाए बिना, उच्च न्यायालय ने अपीलीय प्राधिकारी को दोनों पक्षों की सुनवाई करने और निर्धारित समय सीमा के प्रश्न पर, अधिमानतः 10 सप्ताह के भीतर, निर्णय लेने का निर्देश दिया। इस प्रकार, अदालत ने मूल चुनाव याचिका के समय-बाधित होने के मुद्दे को अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय के लिए छोड़ दिया।

(इनपुट: ANI)

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