हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मातृत्व लाभ के लिए

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट: मातृत्व लाभ मांगने पर बर्खास्त गर्भवती महिला वैज्ञानिक की सेवा पर रोक को हटाया

Himachal Pradesh High Court

शिमला (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार को मातृत्व लाभ के लिए आवेदन करने के तीन दिन बाद बर्खास्त की गई एक गर्भवती महिला वैज्ञानिक की बर्खास्तगी पर रोक लगा दी और अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक उसे काम जारी रखने की अनुमति दी जाए। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ ने भारत संघ और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ आईना शर्मा द्वारा दायर एक रिट याचिका की सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया ।

याचिका पर 9 अक्टूबर को हुई सुनवाई

याचिका पर 9 अक्टूबर को सुनवाई हुई और लिखित आदेश अब उपलब्ध करा दिया गया है। न्यायालय ने 7 अगस्त, 2026 के बर्खास्तगी आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी और प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे डॉ. शर्मा को उनके मूल नियुक्ति पत्र दिनांक 24 जुलाई, 2024 के तहत वैज्ञानिक-बी के रूप में काम जारी रखने की अनुमति दें। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर, 2026 को होगी। उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, नई दिल्ली, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर वायरल अनुसंधान एवं निदान प्रयोगशाला), सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग, एआईएमएस बिलासपुर के प्रधान अन्वेषक के माध्यम से केंद्र को नोटिस जारी किया है। प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।

4 अगस्त, 2026 को मातृत्व लाभ प्राप्त करने के लिए एक आवेदन प्रस्तुत

याचिका के अनुसार, डॉ. शर्मा को केंद्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग द्वारा वित्त पोषित वायरल अनुसंधान और निदान प्रयोगशाला योजना के तहत वैज्ञानिक-बी (चिकित्सा) के रूप में 14 मार्च, 2024 को जारी एक विज्ञापन के बाद नियुक्त किया गया था। उनकी प्रारंभिक एक वर्षीय नियुक्ति को बाद में 31 मार्च, 2027 तक बढ़ा दिया गया था। उन्होंने 4 अगस्त, 2026 को मातृत्व लाभ प्राप्त करने के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया और आरोप लगाया कि तीन दिन बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। प्रतिवादियों ने कहा कि यह बर्खास्तगी 16वें वित्त आयोग की अवधि (2026-27 से 2030-31 तक) के लिए वीआरडीएल योजना के तहत संशोधित स्टाफिंग पैटर्न को लागू करने के परिणामस्वरूप हुई है। इस फैसले को चुनौती देते हुए शर्मा ने तर्क दिया कि उनकी संविदा अवधि 31 मार्च, 2027 तक बढ़ा दी गई थी और योजना को बंद नहीं किया जा रहा था।

मातृत्व लाभ मांगने के तुरंत बाद उसकी सेवाएं समाप्त करना अवैध

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार इसे एक अलग नाम से फिर से शुरू करने और संविदा कर्मचारियों की नए सिरे से भर्ती करने का प्रस्ताव कर रही है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि मातृत्व लाभ मांगने के तुरंत बाद उसकी सेवाएं समाप्त करना अवैध और भेदभावपूर्ण था, खासकर इसलिए क्योंकि उसकी नियुक्ति बढ़ा दी गई थी और कार्यक्रम संशोधित रूप में जारी था। अंतरिम चरण में, उच्च न्यायालय ने बर्खास्तगी आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी और उनकी सेवा जारी रखने का निर्देश दिया। यह आदेश याचिकाकर्ता के आरोपों या प्रतिवादियों के स्पष्टीकरण का अंतिम निर्णय नहीं करता है, जो उनके जवाबों और न्यायालय द्वारा आगे विचार किए जाने के अधीन हैं। वरिष्ठ पैनल वकील नरेंद्र सिंह ठाकुर ने प्रतिवादियों का प्रतिनिधित्व किया। अंतरिम सुरक्षा 18 नवंबर, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक लागू रहेगी।

(इनपुट: ANI)

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