हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर: 61 दिन में 250 मौतें, ₹1184 करोड़ का नुकसान; जानें तबाही का पूरा आंकड़ा
शिमला (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून भारी तबाही लेकर आया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले 61 दिनों में मौसम संबंधी घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं के कारण मरने वालों की संख्या 250 तक पहुंच गई है। लगातार हो रही भारी बारिश से पहाड़ी राज्य भर में सड़क संपर्क, बिजली और पानी की आपूर्ति व्यापक रूप से बाधित हुई है।
प्रशासनिक कार्रवाई और राहत कार्य
प्रभावित जिलों में प्रशासन की ओर से राहत और बहाली कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं। आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (Emergency Response Teams) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संबंधित विभाग और अधिकारी बंद सड़कों को फिर से खोलने तथा बाधित बिजली और पानी की आपूर्ति को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
हादसों और आपदाओं में गई जानें
30 जून से 29 अगस्त तक की समेकित (cumulative) रिपोर्ट के अनुसार, मौसम संबंधी घटनाओं में 103 लोगों की मौत हुई है, जबकि 147 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए हैं। इससे कुल मौतों का आंकड़ा 250 हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आपदा संबंधी 103 मौतों में से 31 मौतें पेड़ों या खड़ी चट्टानों से गिरने के कारण, 18 भूस्खलन (landslides) में, 13 डूबने से, 11 सर्पदंश से और 10 मौतें करंट लगने (electrocution) की घटनाओं में दर्ज की गई हैं। वहीं, मानसून से जुड़ी घटनाओं में अब तक 451 लोग घायल हुए हैं और एक व्यक्ति अभी भी लापता है।
सड़कें और बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित
राज्य भर में रविवार सुबह तक 64 सड़कें अवरुद्ध थीं, जबकि पिछली शाम तक यह आंकड़ा 54 था। मंडी जिला इससे सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहां 24 सड़कें बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 16, और कांगड़ा तथा सिरमौर दोनों जिलों में 7-7 सड़क संपर्क मार्ग बाधित हैं।
बिजली और पानी की आपूर्ति चरमराई
भारी बारिश और भूस्खलन के कारण 225 वितरण ट्रांसफार्मर क्षेत्र (DTRs) ठप हो गए हैं, जिससे बिजली आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। इनमें से अकेले 217 ट्रांसफार्मर मंडी जिले के गोहर डिवीजन में हैं। इसके अतिरिक्त 9 पेयजल योजनाएं भी बाधित हुई हैं। इनमें हमीरपुर के बड़सर उपमंडल की 7 और शिमला के रामपुर उपमंडल की 2 योजनाएं शामिल हैं।
करोड़ों का आर्थिक नुकसान और बेघर हुए लोग
इस मानसून सीजन में राज्य को अब तक 1,184 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल क्षति का अनुमान 1,18,446.80 लाख रुपये (करीब 1,184.47 करोड़ रुपये) आंकी गई है। इसमें लोक निर्माण विभाग (PWD) को सबसे ज्यादा 897 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा है, जबकि जल शक्ति विभाग ने 258 करोड़ रुपये से अधिक की क्षति दर्ज की है।
बारिश ने निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। अब तक 17 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 382 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके साथ ही 298 गौशालाएं और 135 झोपड़ियां या शेड भी टूटे हैं। इस अवधि के दौरान राज्य में लगभग 1,000 पशुओं की भी जान गई है। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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