HRTC ड्राइवर यूनियन की 8 अक्टूबर से चक्का जाम की चेतावनी, भ्रष्टाचार के आरोपों और लंबित मांगों पर कार्रवाई की मांग
शिमला (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल सड़क परिवहन निगम (HRTC) ड्राइवर और कर्मचारी यूनियन ने प्रबंधन पर लंबित मांगों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। यूनियन अध्यक्ष मानसिंह ठाकुर ने कहा कि अगर बुधवार शाम तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 8 अक्टूबर से चंबा क्षेत्र में बस सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। इसके बाद 9 अक्टूबर से पूरे हिमाचल प्रदेश में HRTC की बसों का चक्का जाम करने की चेतावनी दी गई है। यूनियन ने बकाया ओवरटाइम के भुगतान और प्रस्तावित 48 घंटे के साप्ताहिक रोस्टर समेत अन्य मांगें भी उठाई हैं।
चंबा के अधिकारी पर जबरन वसूली का आरोप
ठाकुर ने कहा, "हमने चंबा में SO (स्टेशन ऑफिसर) के खिलाफ जबरन वसूली और वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोपों से जुड़े दस्तावेजों के साथ मैनेजमेंट को लिखित शिकायत दी है। जांच और रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद, अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।" उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी ने पठानकोट में एक कंडक्टर से 4,000 रुपये लिए और उसे एक सादे कागज पर लिखकर दिया। इसके अलावा 3,525 रुपये के फर्जी बिल के सिलसिले में कंडक्टरों से पैसे की मांग करने और कर्मचारियों से जबरन 75,000 रुपये लेने का भी आरोप लगाया। ठाकुर के मुताबिक, यह रकम वापस नहीं की गई।
जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का दावा
ठाकुर ने कहा कि यूनियन ने यह मामला HRTC मैनेजमेंट के सामने उठाया था और मैनेजिंग डायरेक्टर ने 25 सितंबर से पहले कार्रवाई का भरोसा दिया था। इसके बाद एक कमेटी बनाई गई और उसकी रिपोर्ट भी मैनेजमेंट तक पहुंच गई। उन्होंने आरोप लगाया, "DDM (डिप्टी डिवीजनल मैनेजर) चंबा ने भी लिखित में दिया है कि हमारे द्वारा उठाए गए आरोप सच हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से, आज तक इस व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।"
राजनीतिक संबंधों का दावा कर धमकाने का आरोप
यूनियन नेता ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी अब मजबूत राजनीतिक संबंध होने का दावा करके ड्राइवर और कंडक्टरों को डरा-धमका रहा है। ठाकुर ने इस विवाद को 37 लाख रुपये के कथित घोटाले से भी जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि इसी अधिकारी का पहले विजिलेंस जांच से सामना हुआ था, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने उसे बचाया। ठाकुर ने कहा, "जब भी हम फ़ाइल के बारे में पूछते हैं, तो हमें बताया जाता है कि वह यहाँ है या वहाँ। जब मैंने CGM पंकज सिंघल से बात की, तो मुझे बताया गया कि ‘ऊपर से दबाव’ है। मैं जानना चाहता हूँ कि यह किसका दबाव है और इस अधिकारी को क्यों बचाया जा रहा है।"
कर्मचारियों के लिए समान नियम लागू करने की मांग
ठाकुर ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर नियमों को समान रूप से लागू करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्राइवरों और कंडक्टरों को छोटी-मोटी शिकायतों पर भी सस्पेंड या नौकरी से निकाल दिया जाता है, जबकि गंभीर गड़बड़ी के आरोपी वरिष्ठ अधिकारियों को बचाया जाता है। उन्होंने कहा, "कानून सभी के लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर किसी ड्राइवर या कंडक्टर को 100 या 150 रुपये के लिए सस्पेंड या नौकरी से निकाला जा सकता है, तो इतने गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?"
कंडक्टर नंद लाल की मौत का भी जिक्र
ठाकुर ने कंडक्टर नंद लाल की मौत का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नंद लाल ने रावी नदी में छलांग लगा दी थी। यूनियन नेता ने इस मामले में एक अन्य कर्मचारी सुरेंद्र को नौकरी से निकाले जाने पर भी सवाल उठाए। यूनियन अध्यक्ष ने कहा कि संगठन ने मैनेजमेंट को कार्रवाई के लिए बुधवार शाम तक की समय-सीमा दी है। उन्होंने कहा कि इसके बाद यूनियन चरणबद्ध तरीके से आंदोलन शुरू करेगी।
पहले चंबा, फिर पूरे हिमाचल में सेवाएं बंद करने की चेतावनी
ठाकुर ने चेतावनी दी, "अगर कल शाम तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो हम सबसे पहले 8 अक्टूबर को चंबा क्षेत्र में कामकाज बंद कर देंगे। हम गेट बंद कर देंगे और बसें नहीं चलाएंगे। अगर सरकार फिर भी कार्रवाई नहीं करती है, तो हम 9 अक्टूबर से पूरे हिमाचल प्रदेश में HRTC की सेवाएं बंद कर देंगे।" उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से मामले में दखल देने और आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की।
ओवरटाइम भुगतान को लेकर भी नाराजगी
कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे के अलावा, ठाकुर ने सेवा से जुड़ी कई मांगें भी उठाईं। इनमें बकाया ओवरटाइम का भुगतान शामिल है। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट ने 12 महीने के भुगतान का वादा किया था, लेकिन केवल सात महीने का ओवरटाइम जारी किया गया। उन्होंने ड्राइवरों और कंडक्टरों के लिए प्रस्तावित 48 घंटे के साप्ताहिक रोस्टर का भी विरोध किया। ठाकुर ने कहा कि कर्मचारियों को दिन में आठ घंटे काम करना चाहिए, लेकिन ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी जिससे बाद के दिनों में काम के घंटे बढ़ जाएं।
48 घंटे के रोस्टर का विरोध
ठाकुर ने कहा, "हम अपनी रोज़ाना की आठ घंटे की ड्यूटी करेंगे, लेकिन हम ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं करेंगे जिसमें एक दिन कम घंटे काम करने की भरपाई अगले दिन 12 या 13 घंटे की ड्यूटी से की जाए।" उन्होंने CGM पंकज सिंघल को ड्राइवरों और कंडक्टरों को प्रभावित करने वाले मनमाने फैसलों को लेकर भी आगाह किया। यूनियन नेता ने कहा कि प्रस्तावित आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मैनेजमेंट उनकी मांगें पूरी नहीं करता और भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता। (Source: ANI)
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