ओडिशा के पुरी में सोमवार को देवस्नान पूर्णिमा (स्न

पुरी में भक्ति का सैलाब: स्नान यात्रा में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उमड़े हजारों श्रद्धालु

Puri Witnesses Grand Devotional Gathering

पुरी: ओडिशा के पुरी में सोमवार को देवस्नान पूर्णिमा (स्नान यात्रा) के पावन अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के पवित्र स्नान समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान देशभर से आए हजारों श्रद्धालु भी इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने।

108 कलशों के जल से हुआ पवित्र स्नान

स्नान यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 कलशों के पवित्र जल से अभिषेक किया गया। यह सदियों पुरानी परंपरा भगवान जगन्नाथ के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया। एक श्रद्धालु ने एएनआई से बातचीत में कहा, "हम हर साल भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आते हैं। स्नान यात्रा में शामिल होना हमारे लिए बेहद खुशी की बात है। आज भगवान जगन्नाथ का प्रकटोत्सव है और उनकी शोभायात्रा देखना अद्भुत अनुभव है।"

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए ओडिशा पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) सेंट्रल रेंज सत्यजीत नाइक और पुरी के एसपी प्रतीक सिंह ने सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया।

भीड़ प्रबंधन के लिए 79 प्लाटून पुलिस बल तैनात किए गए। इसके अलावा त्वरित कार्रवाई दल (QAT), डॉग स्क्वॉड, छतों पर निगरानी दल और एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) की भी व्यवस्था की गई।

क्या है स्नान यात्रा का महत्व?

देवस्नान पूर्णिमा हिंदू पंचांग के ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को मंदिर के गर्भगृह से स्नान मंडप तक भव्य शोभायात्रा के साथ लाया जाता है और 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है।

गजानन वेश और अनावसार परंपरा

स्नान के बाद भगवान को गजानन वेश (हाथी बेसा) धारण कराया जाता है। मान्यता है कि इस विशेष स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और लगभग 15 दिनों के लिए अनावसार में रहते हैं। इस दौरान उन्हें विशेष औषधीय 'फुलुरी तेला' अर्पित किया जाता है और भक्त चित्रित प्रतिमाओं के दर्शन करते हैं।

रथ यात्रा से पहले खास अवसर

अनावसार की अवधि पूरी होने के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथ यात्रा में शामिल होते हैं। यह पुरी की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में से एक है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

(एएनआई)

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