हैदराबाद में 'डिजिटल अरेस्ट' कर रिटायर्ड कर्मचारी से 29 लाख की ठगी, दो शातिर गिरफ्तार; ऐसे खुला राज
हैदराबाद (तेलंगाना)। हैदराबाद सिटी साइबर क्राइम पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर एक 63 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनकी बेटी से 29.17 लाख रुपये ठगने वाले अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य सरगना समेत एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।
ऐसे दिया गया था वारदात को अंजाम
शिकायत के मुताबिक, पीड़ित बुजुर्ग को पहली बार 3 मार्च को ठगों ने निशाना बनाया था। खुद को दिल्ली पुलिस, सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर आरोपियों ने पीड़ित पर मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर आरोप लगाया। ठगों ने उन्हें 68 मिलियन रुपये के मामले में फंसा होने की बात कहकर तत्काल गिरफ्तारी का डर दिखाया। अपनी बात को पुख्ता करने के लिए अपराधियों ने फर्जी दस्तावेज और बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट के गलत इस्तेमाल के कागजात भी भेजे।
'राष्ट्रीय सुरक्षा' का हवाला देकर डराया
'राष्ट्रीय सुरक्षा' प्रोटोकॉल का झांसा देकर जालसाजों ने पीड़ित परिवार को इस मामले की जानकारी किसी से भी साझा न करने की धमकी दी। इसके बाद "वित्तीय सत्यापन प्रक्रिया" के नाम पर उनकी सारी जमा पूंजी अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा ली गई। पैसे ट्रांसफर होने के बाद जब ठगों ने संपर्क काटा, तब पीड़ितों को खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।
मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो का जाल
तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट के आधार पर इंस्पेक्टर के. नारायण रेड्डी की टीम ने अमीरपेट से आरोपी मोहम्मद अशफाक हुसैन (27) और अहमद नजीब उद्दीन (27) को धर दबोचा। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी आर्थिक तंगी के चलते बेंगलुरु के रहने वाले सचिन के संपर्क में आए थे। ठगी की रकम को पहले बैंक खातों में मंगाया जाता था, फिर चेक से कैश निकालकर कैश डिपॉजिट मशीनों (CDM) के जरिए अलग-अलग खातों में खपाया जाता था। इसके बाद उस नकदी से 'टेथर' (USDT) क्रिप्टोकरेंसी खरीदकर ऑनलाइन बेची जाती थी।
आगे की कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के पास से दो आईफोन बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देश भर में दर्ज कम से कम 16 साइबर धोखाधड़ी के मामलों में संलिप्त है। आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66(C) और 66(D) के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अदालत में पेश करने के बाद फरार आरोपी सचिन की तलाश में जुटी है। यह पूरी कार्रवाई डीसीपी (CCS, DD) एस. चैतन्य कुमार के निर्देशन और एसीपी आर.जी. शिवा मारुति की देखरेख में पूरी की गई। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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