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IDSFFK 2026: 31 फिल्मों की सेंसर छूट पर रोक लगाने के केंद्र के फैसले पर शशि थरूर ने जताई कड़ी आपत्ति

Congress MP Shashi Tharoor (File Photo)

तिरुवनंतपुरम (केरलम)। कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने 18वें 'इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल' (IDSFFK) के लिए चयनित 31 फिल्मों को सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा स्क्रीनिंग एग्जेंप्शन (सेंसर छूट) देने से इनकार करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। तिरुवनंतपुरम में आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित महोत्सव से पहले हुए इस घटनाक्रम को थरूर ने "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला" करार दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए शशि थरूर ने केंद्र सरकार के इस फैसले की तीखी आलोचना की। उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से सीधे हस्तक्षेप करने और नौकरशाही के इस फैसले को पलटने की अपील की है। थरूर ने लिखा कि यह भारत की उस गौरवान्वित परंपरा के साथ भी विश्वासघात है, जो दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ सिनेमा को अपने यहाँ आश्रय देती रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे फैसलों से वैश्विक स्तर पर कलाकारों, फिल्म निर्माताओं और लेखकों के बीच देश की छवि धूमिल होने का खतरा है।

347 में से 31 फिल्मों की छूट रोकी गई

इस महोत्सव के आयोजक 'केरल स्टेट चलचित्र अकादमी' (Kerala State Chalachitra Academy) द्वारा कुल 347 टाइटल्स जमा किए गए थे। इनमें से सारांश (synopsis) की समीक्षा करने और स्क्रीनर्स की मांग के बाद, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 31 फिल्मों के लिए सेंसर छूट रोक दी है।

इन रोकी गई फिल्मों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आधिकारिक रूप से चयनित प्रतियोगिता और क्यूरेटेड सेक्शन से 18 फिल्में।
  • इंटरनेशनल नॉन-फिक्शन श्रेणी से 9 फिल्में।
  • फेस्टिवल विनर्स सेक्शन से 3 फिल्में।
  • नेपाल पैकेज से 1 फिल्म।
  • 1 मलयालम फिल्म — 'Globe', जो अटप्पड़ी (Attappady) के आदिवासी जीवन को दर्शाती है।

इन अस्वीकृत फिल्मों के विषय राजनीतिक असहमति और जातिगत अधिकारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्षों तक फैले हुए हैं। इनमें कोविड-19 के दौरान दिल्ली में अनुबंध पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों और जातिगत गतिशीलता पर केंद्रित 'Sanitised Republic: Caste and Contracts'; इस ऐतिहासिक स्थल से जुड़ी सार्वजनिक स्मृति और इतिहास को तलाशने वाली 'Parliament Street'; फिल्म निर्माता सेपिदेह फारसी और एक फिलिस्तीनी फोटोर्नलिस्ट के बीच वीडियो कॉल के माध्यम से गाजा के जीवन को दस्तावेज रूप देने वाली 'Put Your Soul on Your Hand and Walk'; नागरिक फुटेज के माध्यम से ईरान में हुए प्रदर्शनों की जांच करने वाली 'Memories of a Window'; और लेबनान तथा सीरिया के व्यक्तिगत अभिलेखागार के जरिए क्रांति और निर्वासन की कहानी कहने वाली 'Birds of War' शामिल हैं। इसके अलावा 'Our Land' और 'Land of My Dreams' जैसी फिल्में भी इस सूची में हैं।

केरल सरकार और अकादमी की प्रतिक्रिया

केरल के संस्कृति, सिनेमा और पर्यटन मंत्री पीसी विष्णुनाथ ने इस फैसले की निंदा करते हुए कहा कि इतनी कठोर चयन प्रक्रिया से गुजरने वाली फिल्मों को स्क्रीनिंग की अनुमति न देना, फिल्म महोत्सव की क्यूरेटोरियल स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने जैसा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दर्शकों को स्वतंत्र रूप से फिल्में देखने और अपने खुद के विचार बनाने, व्यक्त करने तथा उनकी आलोचना करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

केरल स्टेट चलचित्र अकादमी ने आधिकारिक तौर पर एक नई समीक्षा (fresh review) का अनुरोध किया है। अकादमी ने रेखांकित किया है कि डेलिगेट्स, जूरी सदस्यों और फिल्म निर्माताओं ने अपनी यात्रा की योजनाएं पहले ही तय कर ली हैं और डिस्ट्रीब्यूशन स्क्रीनिंग फीस भी जमा की जा चुकी है। अकादमी ने चेतावनी दी है कि क्लियरेंस रोकने से महोत्सव का पूरा शेड्यूल बाधित हो सकता है।

महोत्सव की मुख्य बातें और तिथियां

  • आयोजन तिथि: यह महोत्सव 25 से 30 सितंबर तक केरल स्टेट चलचित्र अकादमी में आयोजित होगा।
  • वेन्यू: यह कार्यक्रम राज्य की राजधानी के कैरली, श्री और नीला थिएटर्स में आयोजित किया जाएगा।

नीना सबनानी को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्म निर्माण में उत्कृष्ट योगदान के लिए 18वें IDSFFK का 'लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार' प्रख्यात एनिमेशन फिल्ममेकर नीना सबनानी को प्रदान किया जाएगा। इस पुरस्कार में ₹2 लाख का नकद पुरस्कार, एक मूर्ति और एक प्रशस्ति पत्र (citation) शामिल है।

यह सम्मान 30 सितंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम के कैरली थिएटर में महोत्सव के समापन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री वीडी सतीशान द्वारा प्रदान किया जाएगा। महोत्सव में नीना सबनानी की 10 विशिष्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी, जिसमें उनकी अनूठी दृश्य भाषा के माध्यम से स्मृति, वस्तुएं और कहानियां एक साथ मिलती हैं। पारंपरिक कलाकारों और लोक कथाकारों के साथ उनके सहयोग को 'वी मेक इमेजेस' (We Make Images) सहित राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कृतियों के साथ काफी सराहना मिली है। 

एक एनिमेटर, इलस्ट्रेटर, शोधकर्ता और शिक्षिका के रूप में, नीना सबनानी कला, कहानी कहने, नृवंशविज्ञान (ethnography) और मौखिक परंपराओं को खूबसूरती से पिरोती हैं। उन्हें वर्ष 2016 में पारंपरिक भील कलाकार शेर सिंह के साथ मिलकर बनाई गई फिल्म 'हम चित्र बनाते हैं' (Hum Chitra Banate Hain) के लिए सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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