'अगर हम भाजपा में होते, तो हम राजा हरिश्चंद्र होते': लारा मामले में कोर्ट में पेशी के बाद तेजस्वी यादव का बयान
पटना (बिहार)। आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, जो शनिवार को लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के साथ लारा परियोजना मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए, ने कहा कि परिवार अदालत के साथ सहयोग कर रहा है, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों द्वारा राजनीतिक निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया।
हम दृढ़ता से अपना पक्ष रख रहेः तेजस्वी
पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, "अदालत की अपनी प्रक्रिया है, जिसका हम पालन करते हैं, और अदालत को जिस भी सहयोग की आवश्यकता होती है, हम वह प्रदान करते हैं। लेकिन आप सभी इस मामले को जानते हैं: अगर हम भाजपा में होते, तो हम राजा हरिश्चंद्र की तरह ईमानदारी की मिसाल होते, लेकिन चूंकि हम भाजपा के खिलाफ लड़ रहे हैं, इसलिए ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग हमारे पीछे पड़े हैं, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हम दृढ़ता से अपना पक्ष रख रहे हैं।"
आरोप-निर्धारण 30 अक्टूबर तक के लिए स्थगित
चुनाव आयोग के कामकाज और विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "जनता अब सब कुछ जानती है - जिस तरह चुनाव आयोग का मुखौटा उतर गया है, उसी तरह सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग का मुखौटा भी उतरेगा।" यह फैसला राउज़ एवेन्यू कोर्ट द्वारा शनिवार को लारा प्रोजेक्ट मनी लॉन्ड्रिंग मामले में औपचारिक आरोप-निर्धारण को 30 अक्टूबर तक के लिए स्थगित करने के बाद आया है। यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला IRCTC सीबीआई मामले से जुड़ा है। विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार ने औपचारिक आरोप-निर्धारण को 30 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया। ईडी को पूर्ववर्ती न्यायालय के निर्देश के मद्देनजर निर्देश लेने को कहा गया है।
आरोपियों की पेशी की तारीख 3 अक्टूबर थी
आरोप-निर्धारण का निर्देश देते हुए पूर्ववर्ती न्यायालय ने कहा था कि वह औपचारिक आरोप-निर्धारण पारित करेगा और इसकी सूचना वर्तमान न्यायालय को दी जाएगी। आरोपी न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर औपचारिक आरोपों पर हस्ताक्षर करेंगे। आरोपियों की पेशी की तारीख 3 अक्टूबर तय की गई थी। पूर्व विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने राउज़ एवेन्यू अदालत से तबादला होने के बाद 10 सितंबर को द्वारका अदालत में बैठकर लारा प्रोजेक्ट्स, राबड़ी देवी, तेजस्वी, लालू प्रसाद यादव, पीसी गुप्ता, सरला गुप्ता, सुजाता होटल्स और विजय कोचर एवं विनय कोचर के खिलाफ धन शोधन के आरोप तय करने का निर्देश दिया था।
IRCTC होटल निविदा घोटाले में अनियमितताओं का है मामला
हालांकि, औपचारिक आरोप तय करने का आदेश पारित होने से पहले ही तत्कालीन विशेष न्यायाधीश का तबादला दिल्ली उच्च न्यायालय में रजिस्ट्रार (सतर्कता) के पद पर हो गया। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आरोप पर आदेश सुरक्षित रख लिया। इसके बाद उनका तबादला द्वारका जिला न्यायालय में हो गया। शनिवार को सुनवाई के दौरान, अधिवक्ता मनु मिश्रा और इनाम ईडी की ओर से पेश हुए और निर्देश लेने का वचन दिया। दूसरी ओर, अधिवक्ता नवीन कुमार और वरुण जैन लालू परिवार की ओर से पेश हुए। यह कथित धन शोधन का मामला सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए IRCTC होटल निविदा घोटाले में अनियमितताओं से जुड़ा है।
16 आरोपियों में से 9 के खिलाफ आरोप तय करने के निर्देश
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने (अब स्थानांतरित) ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर 16 आरोपियों में से 9 के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया। अदालत ने गौर किया कि ईडी का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान रांची और पुरी में IRCTC होटलों के लिए निविदा अपने पसंदीदा बोलीदाताओं के पक्ष में तय की और अपनी पत्नी (राबड़ी देवी) और बेटे (तेजस्वी प्रसाद यादव) के माध्यम से सफल बोलीदाता की जमीनें बेशर्मी से प्राप्त कीं। अदालत ने गौर किया कि ये जमीनें पहले उनके सहयोगी (पूर्व केंद्रीय मंत्री पीसी गुप्ता) की एक कंपनी द्वारा बेहद कम कीमत पर खरीदी गईं और बाद में इस कंपनी के शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रसाद यादव को मामूली कीमत पर बेच दिए गए।
2005 से 2014 तक के आरोपों से मिला स्पष्ट संकेत
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि आरोपों के मुद्दे पर फैसला करने से पहले, "अदालत को यह निर्धारित करना होगा कि क्या लालू प्रसाद यादव ने सत्ता के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को वास्तव में दरकिनार कर दिया था ताकि कथित तौर पर अनुचित लाभ को बेदाग तरीके से पेश किया जा सके।" न्यायालय ने कहा कि ईडी के 2005 से 2014 तक के आरोपों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में, रांची और पुरी में रेलवे होटलों का ठेका सुजाता होटल्स को देने के लिए रेल अधिकारियों द्वारा निविदा में हेराफेरी की गई थी। इसके बदले में, सुजाता होटल्स के निदेशकों, विनय कोचर और विनय कोचर ने पटना स्थित अपनी प्रमुख भूमि को पीसीगुप्ता और उनकी पत्नी सरला गुप्ता द्वारा नियंत्रित डीएमसीपीएल नामक कंपनी को कम मूल्य पर हस्तांतरित कर दिया था, न्यायालय ने कहा।
पद के दुरुपयोग से अपराध की कमाई का प्रबल संदेह
सरला गुप्ता और अन्य लोगों ने बाद में इस कंपनी के शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रसाद यादव को बहुत कम कीमत पर हस्तांतरित कर दिए। अदालत ने आगे कहा कि इस लगभग मुफ्त में मिली जमीन को नियंत्रित करने वाली नई इकाई लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी है। अदालत ने कहा, "इस बात का प्रबल संदेह है कि लालू प्रसाद यादव द्वारा पद के दुरुपयोग से अपराध की कमाई उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव के हाथों में पहुंची, जो पटना के एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित इस दागी जमीन का उपयोग करना जारी रखे हुए हैं।" अदालत ने कहा कि पटना स्थित यह जमीन अपराध की कमाई है और लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, राबड़ी देवी, तेजस्वी प्रसाद यादव, लालू प्रसाद यादव, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, सुजाता होटल्स, विनय कोचर और विजय कोचर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप तय किया जा सकता है।
(इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: मध्य प्रदेश टाइगर स्ट्राइक फोर्स की जांच में वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ से 27 घंटे तक हुई पूछताछ