तमिलनाडु में नौसेना को मिला स्वदेशी युद्धपोत 'अमिनी', 80% से अधिक देसी तकनीक से लैस
कट्टुपल्ली: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता द्वारा देश में ही डिजाइन और बनाया गया एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो-वॉटर क्राफ्ट अमिनी गुरुवार को तमिलनाडु के कट्टुपल्ली में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। भारतीय नौसेना ने कहा, "डिफेंडर्स ऑफ द डीप - 'अमिनी', @OfficialGRSE द्वारा बनाया गया नवीनतम स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) 05 नवंबर 26 को कट्टुपल्ली में #IndianNavy को डिलीवर किया गया।" केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप के नाम पर रखे गए इस जहाज को पहले के INS अमिनी का नया रूप माना जा रहा है। पुराना INS अमिनी एक पेट्या III-क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर कार्वेट था, जिसे 2002 में नौसेना से सेवामुक्त कर दिया गया था। इसके साथ ही नौसेना ने पुराने जहाजों के खास नामों को बरकरार रखने की अपनी परंपरा को जारी रखा है। भारतीय नौसेना के मुताबिक, यह जहाज नवीनतम हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और सोनार से लैस है। ये उपकरण इसे समुद्र के भीतर दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम बनाते हैं।
80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल
80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ अमिनी की डिलीवरी आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप देश में युद्धपोत निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय नौसेना के मुताबिक, यह जहाज घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती ताकत को दर्शाता है और रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा। नौसेना ने कहा, "80% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, यह जहाज हमारे घरेलू रक्षा विनिर्माण तंत्र को मजबूत करता है और #AatmanirbharBharat के लिए देश की प्रतिबद्धता को पक्का करता है।"
53,866 करोड़ रुपये में 8 नए कॉर्वेट बनाने का समझौता
इससे पहले, 2 नवंबर को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 8 अगली पीढ़ी के कॉर्वेट बनाने के लिए गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इन अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत GRSE पांच कॉर्वेट बनाएगा, जबकि GSL शेष तीन कॉर्वेट का निर्माण करेगा। यह परियोजना भारत की स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमताओं की दिशा में एक अहम कदम है। इन जहाजों को भारतीय नौसेना डिजाइन करेगी और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (DPSUs) प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए चयनित शिपयार्ड में इनका निर्माण करेंगे।
घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को मिलेगी मजबूती
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह परियोजना रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, निजी शिपयार्ड और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) सहित भारतीय औद्योगिक भागीदारों को एक साथ लाएगी। इससे देश के घरेलू जहाज निर्माण तंत्र को मजबूती मिलेगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
(एएनआई)
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