दिल्ली साइबर पुलिस का बड़ा खुलासा, अहमदाबाद से APK आधारित ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़
नई दिल्ली: दक्षिण जिले के साइबर पुलिस स्टेशन ने APK आधारित साइबर धोखाधड़ी में कथित रूप से शामिल एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। अहमदाबाद से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 11 क्रेडिट कार्ड और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। आरोपियों की पहचान मोहम्मद इस्माइल अंसारी, शेख मोहम्मद नूरेन और तारिक अहमद के रूप में हुई है, ये सभी गुजरात के अहमदाबाद के निवासी हैं।
फर्जी लिंक से 6.57 लाख की ठगी
पुलिस के अनुसार, मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने शिकायत की कि उसे एक फर्जी लिंक वाला एसएमएस प्राप्त हुआ और उससे 6.57 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। इसके बाद दक्षिण साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत ई-एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान पुलिस ने धन के लेन-देन, बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया और आरोपियों से जुड़े दो क्रेडिट कार्डों के माध्यम से दो लेनदेन में लगभग 4 लाख रुपये की कथित रकम का पता लगाया।
कमीशन के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल और APK ठगी का पर्दाफाश
पुलिस ने बताया कि जांच में पता चला कि आरोपी कमीशन के आधार पर बैंकिंग चैनलों के माध्यम से धोखाधड़ी की रकम को स्थानांतरित करने के लिए कई क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करा रहे थे। आरोपी व्हाट्सएप और टेलीग्राम समूहों के माध्यम से अन्य संचालकों से भी जुड़े हुए थे। पुलिस ने बताया कि तकनीकी जांच में आगे पता चला कि नेटवर्क से जुड़े कुछ व्हाट्सएप नंबर अमेरिका से संबंधित थे। पुलिस के अनुसार, कथित गिरोह ने APK आधारित धोखाधड़ी का इस्तेमाल किया, जिसमें पीड़ितों को फर्जी संदेशों के माध्यम से भेजे गए दुर्भावनापूर्ण APK फ़ाइलों को इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित किया गया। इन एप्लिकेशन के जरिए पीड़ितों के मोबाइल उपकरणों और बैंकिंग संबंधी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच संभव हो गई।
बैंक कर्मचारी की संलिप्तता और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच
पुलिस ने बताया कि IDBI बैंक के संविदा कर्मचारी अंसारी ने कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने के लिए कई क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए। नूरेन और अहमद ने कथित तौर पर कमीशन आधारित धोखाधड़ी लेनदेन के लिए क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए या उनकी व्यवस्था की। पुलिस ने बताया कि अमेरिका स्थित कथित संचालकों की सटीक भूमिका और पहचान के साथ-साथ कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पूरी संरचना की जांच की जा रही है।
(इनपुट: ANI)
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