मिर्जापुर के हलिया ब्लॉक की ग्राम पंचायत मनिगढ़ा म

मनिगढ़ा पंचायत में अभिलेख न मिलने से अटकी जांच, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई

मनिगढ़ा पंचायत में अभिलेख न मिलने से अटकी जांच

मिर्जापुर: जिले के हलिया ब्लॉक की ग्राम पंचायत मनिगढ़ा में भ्रष्टाचार का मामला अब फाइलों में दम तोड़ता नजर आ रहा है। शिकायतकर्ता अब्दुल समद का दावा है कि उन्होंने 300 से अधिक पन्नों के दस्तावेजों के साथ DM, CDO और DPRO मिर्जापुर को लिखित शिकायत दी है, जिसमें विकास कार्यों के नाम पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं। इस मामले में जिला स्तर से जांच शुरू भी हुई। 29 जनवरी 2026 और 25 मार्च 2026 को जांच और भौतिक सत्यापन की तिथि तय हुई। जांच टीम ने BDO हलिया, सेक्रेटरी और प्रधान को अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, लेकिन आज तक अभिलेख नहीं दिए गए। 

RTI में जवाब नहीं, जांच में रिकॉर्ड गायब

शिकायतकर्ता के मुताबिक जांच अधिकारी ने भी अपनी आख्या में लिखा है कि अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण जांच बाधित है। इसका दूसरा काला पहलू RTI है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पंचायत के विकास कार्यों का हिसाब जानने के लिए उसने दर्जनों RTI आवेदन डाले, लेकिन एक का भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। सवाल लाजमी है, जब आम नागरिक RTI मांगे तो चुप्पी और जब जांच अधिकारी रिकॉर्ड मांगे तो बहानेबाजी, आखिर मनिगढ़ा के दस्तावेज गायब कहां हो गए? क्या कागजी विकास की पोल खुलने के डर से फाइलें छिपाई जा रही हैं? जहां मनिगढ़ा में जांच फाइलों के नीचे दबी है, वहीं देवरिया में आज बड़ा एक्शन हुआ है। 

मिर्जापुर में भी जांच की मांग

CAG ऑडिट में 6.30 करोड़ की वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई, जिसके बाद जिलाधिकारी देवरिया ने 10 ग्राम पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया है। करीब 8.30 करोड़ के गबन के मामले में आय से अधिक संपत्ति की जांच भी शुरू हो गई है। एक सचिव तो प्रमोशन पाकर ADO बन गया था, उसके भी निलंबन की संस्तुति हुई है। पूरे पंचायत विभाग में हड़कंप मचा है। ग्रामीणों की मांग है कि देवरिया की तर्ज पर मिर्जापुर में भी मनिगढ़ा के अभिलेखों को तत्काल सीज कर, वीडियोग्राफी के साथ निष्पक्ष स्थलीय जांच कराई जाए और जिम्मेदारी तय की जाए। 

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