यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तय समय पर होना मुश्किल
UP News : उत्तर प्रदेश में इस साल होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कुछ कानूनी और जटिल प्रक्रियाओं के चलते तय समय पर हो पायेगा, इस पर संशय गहराता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण सीटों की आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना है। गठन के बाद भी आयोग को पिछड़ा वर्ग की सीटों की आरक्षण प्रक्रिया तय करने में एक से डेढ़ महीने तक का समय चाहिए। ऐसे में यूपी में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी हो सकती है।
योगी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में पंचायत चुनाव को लेकर दायर एक जनहित याचिका की नोटिस के जवाब में कहा कि चुनाव से पहले ओबीसी आयोग का गठन होगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर रैपिड सर्वे और पंचायत सीटों पर आरक्षण तय होगा।
यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पहले से निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक इसी साल अप्रैल-मई में कराया जाना है। योगी सरकार ने भी हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामा में समय से पंचायत चुनाव कराने का दावा किया है, लेकिन तमाम जटिल प्रक्रियाओं के चलते ऐसा होना संभव होता नहीं दिख रहा है। समय से चुनाव कराने में सबसे बड़ी बाधा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना है।
आयोग को गठन के बाद भी सीटों की आरक्षण प्रक्रिया तय करने में एक से डेढ़ महीने तक का समय चाहिए। इसके अलावा कई और भी औपचारिकताएं पूरी करनी है, जो कि एक आयोग और सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में समय से चुनाव कराने को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
यूपी के पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर भी की मौकों पर प्रदेश में पंचायत चुनाव समयानुसार अप्रैल-मई में कराए जाने की बात कह चुके हैं, लेकिन तैयारियों को देखते हुए इन दावों पर संशय बना हुआ है। अभी तक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं हो पाया है। इस वजह से आगे की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
सूत्रों का कहना है कि अभी भी यदि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाता है तो भी समय से चुनाव कराना संभव नहीं है। कम से कम एक या दो महीने चुनाव को टालना ही पड़ सकता है। पंचायती राज विभाग के सूत्रों के मुताबिक, निदेशक पंचायती राज ने इससे पूर्व 12 जनवरी को हाईकोर्ट में एक हलफनामा दिया था। ये हलफनामा एक पीआईएल पर जवाब देते हुए दाखिल किया गया था। इसमें कहा गया है कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए पत्रावली शासन को भेज दी गई है। शीघ्र ही निर्णय होने की संभावना है।
इसकी पुष्टि शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने की है। उनका कहना है कि हलफनामा में पंचायत चुनाव के समय को लेकर तिथियों को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि समय से चुनाव होने की संभावना कम ही दिखती है। पंचायत चुनाव कराने में सबसे बड़ी बाधा जातिवार सीटों का आरक्षण तय करना।
जनगणना 2011 के अनुसार, राज्य में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत क्रमशः 20.6982 और 0.5677 प्रतिशत है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इन वर्गों के लिए इतनी ही प्रतिशत सीटें आरक्षित करनी होंगी। इसमें ओबीसी जातियों का प्रतिशत जनगणना में शामिल नहीं था।
जबकि रैपिड सर्वे 2015 के अनुसार, राज्य की ग्रामीण आबादी में अन्य पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी 53.33 प्रतिशत थी। 2021 के चुनाव में इसी सर्वे के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण तय किया गया था। ऐसे में इस बार पंचायत चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रतिशत 27 प्रतिशत रखना अनिवार्य है। इसलिए अबकी बार संख्या में हुए बदलाव को ध्यान में रखते हुए आरक्षण तय करने में समय लग सकता है।
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