'यह शरीर से आत्मा निकालने जैसा होगा': मनमाने ढंग से नाम हटाने पर जस्टिस उज्ज्वल भुयान
हैदराबाद (तेलंगाना)। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के बिना किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाना भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर प्रहार है। हैदराबाद में आयोजित 19वीं NALSAR BRS मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में बोलते हुए न्यायमूर्ति भुयान ने इस बात पर जोर दिया कि मतदान का अधिकार भारतीय नागरिकता से जुड़ा हुआ है।
सभी नागरिकों का मतदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा, “किसी नागरिक का मतदाता होना और मतदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों का आधार है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 22 मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने की अनुमति देती है। लेकिन यह अनुमति तभी दी जानी चाहिए जब संबंधित मतदाता को सुनवाई का उचित अवसर दिया गया हो। मृत व्यक्ति के मामले को छोड़कर, मतदाता सूची में एक बार दर्ज किए गए मतदाता का नाम बिना सूचना और सुनवाई के नहीं हटाया जा सकता।”
भारतीय नागरिक होने के नाते मिला मतदान का अधिकार
उन्होंने आगे कहा, “भारतीय नागरिक होने के नाते, मतदान का अधिकार या मतदाता सूची में शामिल होने का अधिकार किसी से अलग नहीं किया जा सकता। यह शरीर से आत्मा निकालने जैसा होगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान में नागरिकों के दो वर्ग नहीं हैं, एक वर्ग मतदान के अधिकार वाले और दूसरा वर्ग मतदान के अधिकार से वंचित। उन्होंने कहा, “कोई भी ऐसी प्रक्रिया जिससे भारतीय नागरिकों को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित किया जाए और उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया जाए, मेरे विचार से भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का घोर उल्लंघन होगा।”
नाम पटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से मनमानी
उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया जिससे लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जाए और व्यक्तियों को मतदान के अधिकार से वंचित करके द्वितीय श्रेणी के नागरिक बना दिया जाए, वह पूरी तरह से मनमानी है। उन्होंने कहा, “यदि किसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप लाखों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जाता है और उन्हें अपने ही देश में द्वितीय श्रेणी के नागरिक बना दिया जाता है, यानी उन्हें मतदान का अधिकार नहीं दिया जाता, तो ऐसी प्रक्रिया पूरी तरह से मनमानी है। किसी भी तरह की दलील इसे उचित नहीं ठहरा सकती।”
कोई भी किसी भी नागरिक से मतदान का अधिकार नहीं छीन सकता
न्यायमूर्ति भुयान ने घोषणा की कि कोई भी प्राधिकरण किसी भी नागरिक से मतदान का अधिकार नहीं छीन सकता, और कहा, "कोई भी न्यायालय इसका समर्थन या इसे माफ नहीं कर सकता।" उन्होंने दोहराया कि कोई भी व्यक्ति या संस्था संविधान से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा, "यह उस संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन है जिसे हमने भारत के संविधान के आधार पर अपनाया है। भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार विदेशी शासन के विरुद्ध भारत के लंबे संघर्ष से जुड़ा हुआ है। अनुच्छेद 326 के साथ किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता। कोई भी प्राधिकरण ऐसा नहीं कर सकता। कोई भी न्यायालय इसका समर्थन या इसे माफ नहीं कर सकता। कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है।"
(इनपुट: ANI)
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