जबलपुर में क्रूज हादसे के साइड इफेक्ट, बरगी डैम जाने वाले पर्यटक 70% तक हुए कम
जबलपुर। शहर के प्रसिद्ध बरगी बांध में गत माह, 30 अप्रैल को हुए भीषण क्रूज हादसे का एक बड़ा और नकारात्मक असर अब यहां के पर्यटन क्षेत्र पर साफ देखा जा रहा है। यदि सरकारी और गैर-सरकारी आंकड़ों पर गौर करें, तो बरगी डैम में पहुँचने वाले सैलानियों की संख्या अब पहले की तुलना में आधी भी नहीं रह गई है। यहाँ आने वाले पर्यटकों की तादाद में 60 से 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
अब सन्नाटा का राज
जिन पर्यटन स्थलों पर पहले लोग अपने परिवार के साथ सुकून के पल बिताते नजर आते थे, वहाँ अब केवल सन्नाटा और वीरानी ही पसरी दिखाई दे रही है। जानकारों का मानना है कि इस हादसे के बाद न सिर्फ बरगी डैम, बल्कि भेड़ाघाट समेत आसपास के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। प्रबुद्ध नागरिकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जबलपुर में पर्यटन के प्रति लोगों का भरोसा फिर से वापस लाने के लिए प्रशासन को सक्रिय और कड़े प्रयास करने चाहिए।
30 अप्रैल को हुआ था दर्दनाक हादसा
उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल 2026 को बरगी डैम में एक क्रूज हादसा हुआ था, जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों और क्रूज प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण कई हँसते-खेलते घरों के चिराग बुझ गए। इस भयानक हादसे में चार मासूम बच्चों समेत कुल 13 लोगों की जान चली गई थी।
यह राजस्व औऱ आम लोगों के लिए आय का जरिया था
स्थानीय लोगों और पर्यटकों का स्पष्ट मानना है कि यदि पर्यटन विभाग के लोग सुरक्षा व्यवस्था और जरूरी सुविधाओं को लेकर पहले से गंभीर रहते, तो आज यह दर्दनाक स्थिति पैदा ही नहीं होती। टूरिज्म न केवल पर्यटकों को आकर्षित करता है, बल्कि यह जबलपुर शहर के लिए राजस्व और स्थानीय लोगों की आय का भी एक बहुत अच्छा जरिया है। इसलिए, सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर इसे व्यवस्थित ढंग से फिर से पटरी पर लाया जाना बेहद जरूरी है।
पहले 7,000 तक पहुंच जाती थी पर्यटकों की संख्या
जानकारी के मुताबिक, इस हादसे से पहले बरगी बांध मध्य प्रदेश के सबसे प्रमुख और पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से एक गिना जाता रहा है। यहाँ मुख्य रूप से मैकल रिसॉर्ट और बरगी बोट क्लब पर्यटकों के मुख्य आकर्षण के केंद्र हुआ करते थे। यहाँ प्रतिदिन लगभग 1,500 से 2,000 पर्यटक आते थे। वीकेंड में यह संख्या बढ़कर 5,000 से 7,000 तक पहुँच जाती थी। मप्र टूरिज्म का क्रूज और अन्य नावें लगभग हर ट्रिप में अपनी पूरी क्षमता (एक बार में करीब 40-50 लोग) के साथ चलती थीं, लेकिन 30 अप्रैल के हादसे ने यहाँ की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी है।
अब ऐसे हैं हालात
हादसे के तुरंत बाद प्रशासन द्वारा क्रूज संचालन पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी गई है। वहीं दूसरी ओर, हादसे के डर और क्रूज के पूरी तरह बंद होने के कारण पर्यटकों की संख्या में 60 से 70% की भारी गिरावट देखी गई है। अब यहाँ केवल वही गिने-चुने लोग पहुंच रहे हैं जो केवल बांध का नजारा देखने आते हैं। जल क्रीड़ाओं में रुचि लेने वालों की संख्या अब न के बराबर है।
सुरक्षित पर्यटन ही लौटा सकता है विश्वास
अब बरगी डैम और भेड़ाघाट आने वाले पर्यटक खुद भी अपनी सुरक्षा को लेकर पहले से अधिक जागरूक और सतर्क हो गए हैं। भेड़ाघाट में नौका विहार के दौरान लोग अब नाव संचालकों से सुरक्षा उपकरणों (जैसे लाइफ जैकेट) और चालक के लाइसेंस जैसी महत्वपूर्ण चीजों के बारे में पूछताछ करने लगे हैं। हालाँकि, भेड़ाघाट अभी भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, लेकिन बरगी हादसे की टीस और डर अभी भी लोगों के दिलों-दिमाग में घर किए हुए है।
पर्यटन विकास निगम के रीजनल मैनेजर नवीन शर्मा ने बताया कि विभाग अब 'सुरक्षित पर्यटन' के संदेश के जरिए धीरे-धीरे पर्यटकों के बीच विश्वास बहाली करने की कोशिश कर रहा है। बरगी बांध में पर्यटकों की संख्या में निश्चित रूप से कमी आई है, लेकिन भेड़ाघाट एवं अन्य पर्यटन स्थानों पर सैलानियों की संख्या में कोई खास अंतर नहीं आया है।
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