MP News : साइबर धोखाधड़ी में जन - धन खातों का हो रहा इस्तेमाल, तीन गिरफ्तार
Madhya Pradesh : भोपाल। जन-धन योजना के तहत गरीबों और बिना बैंक वाले लोगों के खाते खोले गए। मध्य प्रदेश में ऐसे जीरो बैलेंस खाते अब साइबर ठगों के लिए म्यूल अकाउंट बन चुके हैं। अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। साइबर अपराधियों ने सात बैंक खातों का दुरुपयोग किया, जिनमें दूसरे राज्यों में किए गए अपराधों से लूटे गए पैसे को छुपाया गया। इनमें पाँच खाते जन-धन खाते थे, जिनमें से एक खाता मृत व्यक्ति का था।
ऐसे हुआ धोखाधड़ी का खुलासा
हाल ही में, एक दिहाड़ी मजदूर बिसराम इवने (40) ने अधिकारियों से शिकायत की कि जून 2025 से उसके जन-धन खाते में लगभग 2 करोड़ रुपये के लेन–देन हुए हैं। वह इसे तब जान पाया जब वह बैंक में अपना KYC अपडेट कराने गया। बेतुल जिले के पुलिस अधीक्षक विरेंद्र जैन ने बताया कि साइबर सेल द्वारा की गई प्राथमिक जांच में पता चला कि जून से खाते में लगभग 1.5 करोड़ रुपये का लेन–देन हुआ था।इसी तरह की शिकायतों पर आगे की जांच में छह और खाते मिले, जिनमें से चार जन-धन खाते थे।
इनमें 47.44 लाख रुपये से लेकर 2.24 करोड़ रुपये तक के लेन-देन मिले। कुल राशि बढ़कर 9.84 करोड़ रुपये से अधिक हो गई।चौंकाने वाली बात यह है कि एक जन-धन खाता, जिसमें संदिग्ध लेन–देन पाए गए, राजेंद्र वर्डे नामक व्यक्ति का था, जो अब जीवित नहीं है।एक अन्य संदिग्ध खाता नर्मदा इवने (20) नामक कॉलेज छात्रा की छात्रवृत्ति का खाता था।
SP जैन के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि 9.84 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इन खातों में रखी गई थी, जिन्हें म्यूल खातों की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। यह पैसा वास्तव में महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में किए गए साइबर अपराधों का था।
यह पैसा साइबर अपराधों से इस तरह जुड़ा था
1. क्रिप्टोकरेंसी निवेश धोखाधड़ी 2. फर्जी कस्टमर सर्विस सेंटर से जुड़े घोटाले 3. साइबर फ़िशिंग।
अब तक गिरफ्तार आरोपी
आगे की जांच में बेतूल पुलिस की कई टीमें इंदौर में दो ठिकानों पर गईं, जहाँ से अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। ये हैं - राजा उर्फ आयुष चौहान (28), निवासी सावलीगढ़ (बेतुल), उसका साला अंकित राजपूत (32) और नरेंद्र सिंह राजपूत (42)।
अब तक बरामद हुए- पुलिस ने इनके कब्जे से15 मोबाइल फोन, 21 ATM कार्ड, 28,000 रुपये नकद, 11 बैंक पासबुक (सरकारी और प्राइवेट बैंकों दोनों) बरामद किये हैं।
जांच में पता चला
जांच से पता चला कि मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में साइबर धोखाधड़ी का पैसा छुपाने और घुमाने के लिए 20 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिनमें से कई संभवतः जन-धन खाते हैं। इस धोखाधड़ी में बैंक कर्मचारी की संलिप्तता भी सामने आई। जांच में पाया गया कि एक बैंक का अस्थायी कर्मचारी इस अंतर-राज्यीय गैंग की मदद कर रहा था। यह कर्मचारीखातों तक पहुंच दिलाता था,मोबाइल नंबर बदलवाता था,नए ATM कार्ड जारी करवाता था,इंटरनेट / मोबाइल बैंकिंग सक्रिय करवाता था।
यहाँ तक कि मर चुके खाताधारक के खाते तक भी गैंग को पूरी पहुँच दिलाता था।लेकिन पुलिस द्वारा पकड़े गए तीन लोग सिर्फ इस बहु-स्तरीय गिरोह का एक स्तर हैं। असली मास्टरमाइंड और अन्य लिंक दूसरे राज्यों में सक्रिय हैं।
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