जापान-यूपी बैठक में निवेश बढ़ाने पर जोर, कंपनियों ने गिनाए नए अवसर
नई दिल्ली। जापान और उत्तर प्रदेश के बीच निवेश एवं औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए आयोजित राउंडटेबल मीटिंग में जापानी और भारतीय कंपनियों के बिजनेस लीडर्स व सीईओ शामिल हुए। बैठक में कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में अपने अनुभव, मौजूदा निवेश और विस्तार योजनाओं की जानकारी दी। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ऑटो कंपोनेंट, ईवी, फार्मास्युटिकल, एडवांस मटेरियल, मैन्युफैक्चरिंग, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
निवेशकों ने यूपी की सुविधाओं को बताया मजबूत आधार
बिजनेस लीडर्स ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए बेहतर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, स्किल्ड मैनपावर और सरकार के सहयोग को अहम बताया। कई निवेशकों ने राज्य में मौजूदा निवेश बढ़ाने की योजनाओं की जानकारी दी। कंपनियों ने नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और आरएंडडी सेंटर स्थापित करने की संभावनाएं भी साझा कीं। निवेशकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विस्तार के लिए बेहतर माहौल तैयार हुआ है।
जापान-यूपी साझेदारी को नई दिशा देने पर जोर
राउंडटेबल में निवेशकों ने जापान और उत्तर प्रदेश के बीच बढ़ते सहयोग को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। वक्ताओं ने कहा कि भारत और जापान के बीच लंबे समय से भरोसे पर आधारित संबंध हैं। उत्तर प्रदेश के साथ बढ़ता औद्योगिक सहयोग इस रिश्ते को आर्थिक और तकनीकी साझेदारी में बदल सकता है। जापानी कंपनियां भारत को घरेलू बाजार के साथ ग्लोबल सप्लाई चेन, एक्सपोर्ट और फ्यूचर टेक्नोलॉजी के नजरिए से भी महत्वपूर्ण मान रही हैं।
ऑटो कंपोनेंट कंपनी बढ़ाएगी निवेश और आरएंडडी
ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की एक कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि कंपनी करीब 40 वर्षों से उत्तर प्रदेश में कारोबार कर रही है। समूह के भारत और विदेशों में 45 से अधिक प्लांट हैं और करीब 9,000 लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। कंपनी ने उत्तर प्रदेश में 50 एकड़ से अधिक जमीन पर निवेश की योजना बनाई है। यहां जापानी कंपनियों के साथ ज्वाइंट वेंचर के जरिए इलेक्ट्रॉनिक और ईवी कंपोनेंट बनाए जाएंगे। कंपनी ने आरएंडडी गतिविधियों को भी बढ़ाने की इच्छा जताई है।
आरएंडडी और स्किलिंग बढ़ाने का सुझाव
कंपनी प्रतिनिधि ने राज्य सरकार के सामने आरएंडडी और स्किलिंग से जुड़े दो सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त इंसेंटिव और सपोर्ट दिया जाना चाहिए। इससे राज्य में टेक्निकल सेंटर और रिसर्च गतिविधियों का विस्तार हो सकेगा। उन्होंने उद्योगों की जरूरत के अनुसार इंडस्ट्री-रेडी स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करने पर भी जोर दिया।
जापानी फार्मा कंपनी ने भारत में विस्तार की इच्छा जताई
फार्मास्युटिकल क्षेत्र से जुड़े जापानी प्रतिनिधि ने भारत में अपनी कंपनी की करीब 20 वर्ष पुरानी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कंपनी ने देश में उत्पादन और रिसर्च से जुड़ी गतिविधियों को विकसित किया है। भारत में स्थापित मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च क्षमता का अनुभव कंपनी के लिए सकारात्मक रहा है। प्रतिनिधि ने भविष्य में भारत में कंपनी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।
जापानी कंपनियां भारत को लंबे समय का बाजार मान रहीं
एक जापानी बिजनेस ग्रुप के प्रतिनिधि ने भारत के साथ कंपनी के लंबे कारोबारी संबंधों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियों के लिए भारत केवल निवेश का बाजार नहीं है। यहां लंबे समय के बिजनेस डेवलपमेंट, सप्लाई चेन, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप की भी बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के साथ नए अवसरों पर मिलकर काम करने की इच्छा जताई।
सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल में यूपी के लिए बड़े अवसर
सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल क्षेत्र के बिजनेस लीडर ने इसे उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण औद्योगिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग, मल्टीप्लायर इफेक्ट और एक्सपोर्ट की संभावनाएं मौजूद हैं। जापान को संभावित निर्यात बाजार बताते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल की मांग बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए नीति में बदलाव का सुझाव
बिजनेस लीडर ने सुझाव दिया कि राज्य की नीति में ऐसे प्रोत्साहन शामिल किए जाएं, जिससे उत्तर प्रदेश के अंतर्देशीय क्षेत्रों में बनने वाले उत्पादों को तटीय राज्यों के बंदरगाहों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सके। इससे कंपनियों की लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इससे एक्सपोर्ट आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। उत्तर प्रदेश को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने में भी यह उपयोगी हो सकता है।
ऑटो सेक्टर में उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े जापानी प्रतिनिधि ने उत्तर प्रदेश के बड़े बाजार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन की सराहना की। उन्होंने बताया कि कंपनी पहले से भारत की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों को सप्लाई कर रही है। बढ़ते भारतीय बाजार को देखते हुए कंपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ एक्सपोर्ट और लोकल मैन्युफैक्चरिंग दोनों पर ध्यान दे रही है।
मिंडा ग्रुप के यूपी में 55 प्लांट
मदरसन ग्रुप के प्रेसिडेंट संजय मेहता ने बताया कि कंपनी की स्थापना उत्तर प्रदेश में 1975 में हुई थी। उन्होंने कहा कि समूह के भारत में करीब 175 प्लांट हैं, जिनमें 55 प्लांट उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। कंपनी भारत में करीब एक लाख लोगों को रोजगार देती है और उसका ग्लोबल हेडक्वार्टर नोएडा में है। उन्होंने नोएडा अथॉरिटी और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग की सराहना करते हुए राज्य में विस्तार जारी रखने की बात कही।
लोहम के नए प्लांट से बढ़ेगा निवेश
लोहम के फाउंडर रजत वर्मा ने बताया कि कंपनी ने 2018 में ग्रेटर नोएडा से काम शुरू किया था। उत्तर प्रदेश में कंपनी के चार प्लांट, तीन पायलट प्लांट और एक आरएंडडी सेंटर हैं, जिनसे करीब 1,000 लोगों को रोजगार मिल रहा है। कंपनी दो नए प्लांट स्थापित कर रही है। इनमें एक रेयर-अर्थ बेस्ड मैग्नेट और दूसरा निकल मैंगनीज कोबाल्ट कैथोड से जुड़ा होगा। दोनों परियोजनाओं में करीब ₹1,000 करोड़ के अतिरिक्त निवेश और लगभग 1,000 नए रोजगार की संभावना है।
एडवांस मटेरियल में आरएंडडी बढ़ाने की तैयारी
लोहम ने जापानी विशेषज्ञों की इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञता को भारत में स्किलिंग और इंडस्ट्री ट्रेनिंग के साथ जोड़ने की संभावना जताई। कंपनी उत्तर प्रदेश में एडवांस मटेरियल के क्षेत्र में आरएंडडी और इन्क्यूबेशन इकोसिस्टम विकसित करना चाहती है। इससे नई तकनीक और उत्पादों पर काम करने के अवसर बढ़ सकते हैं। कंपनी ने राज्य में अपनी मौजूदा गतिविधियों के साथ भविष्य के विस्तार की संभावनाएं भी बताईं।
सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर में नए अवसर
एलएंडटी सेमीकंडक्टर के ग्लोबल सीईओ संदीप कुमार ने कहा कि कंपनी जापानी कंपनियों के साथ पहले से काम कर रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में जापानी कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। कंपनी ने अगले पांच वर्षों में करीब 500 नए स्टार्टअप विकसित करने के लिए इकोसिस्टम तैयार करने की योजना साझा की। उन्होंने इसे टियर-2 और टियर-3 शहरों तक ले जाने की जरूरत बताई और डेटा सेंटर क्षेत्र में जापान के साथ सप्लाई चेन मजबूत करने की संभावना जताई।
जापानी औद्योगिक समूह ने भारत में विस्तार के संकेत दिए
एक अन्य जापानी औद्योगिक समूह के प्रतिनिधि ने बताया कि उनकी कंपनी करीब 75 वर्षों से मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में काम कर रही है। दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों में मौजूदगी के बाद कंपनी ने हाल में भारत में भी गतिविधियां शुरू की हैं। अब मेक इन इंडिया के तहत भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। प्रतिनिधि ने संकेत दिया कि भारत जापान के बाहर कंपनी के महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग निवेश केंद्रों में शामिल हो सकता है।
डेन्सो ने नोएडा में ₹500 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी
ऑटो कंपोनेंट कंपनी डेन्सो के प्रतिनिधि ने बताया कि नोएडा स्थित कंपनी का प्लांट लंबे समय से उत्पादन कर रहा है। कंपनी ने हाल में नोएडा में करीब ₹500 करोड़ के नए निवेश को मंजूरी दी है और निर्माण गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। इस निवेश से करीब 500 से 1,000 नए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। कंपनी युवाओं की स्किलिंग पर भी काम कर रही है और अब तक करीब 400 युवाओं को कॉलेज स्तर से जोड़कर प्रशिक्षण दिया गया है।
निवेशकों ने यूपी को बताया बड़ा औद्योगिक केंद्र
राउंडटेबल में शामिल बिजनेस लीडर्स ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए सरकार की सक्रिय भूमिका, बेहतर प्रशासन और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना की। निवेशकों ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल बड़ा घरेलू बाजार नहीं है, बल्कि ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और टेक्नोलॉजी हब के रूप में भी उभर रहा है। जापानी कंपनियों के लिए ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ईवी, एडवांस मटेरियल, फार्मा, ग्रीन एनर्जी और एविएशन जैसे क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं हैं।
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