5 हजार से ज्यादा आवेदकों में से चुने गए जीतेंद्र मिश्रा, कहा- ट्रस्ट के मार्गदर्शन में बनेगी आगे की रणनीति
अयोध्या: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में नियुक्त सेवानिवृत्त वायु मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि वे वर्तमान में पूरी व्यवस्था को समझने का प्रयास कर रहे हैं। ट्रस्ट के मार्गदर्शन और सहयोग से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि एक बार व्यवस्था समझ में आ जाने के बाद वे ट्रस्ट से आदेश और मार्गदर्शन लेंगे और अपनी टीम के साथ मिलकर काम करेंगे। मीडिया से बात करते हुए मिश्रा ने कहा, अभी मैं स्वयं पूरी व्यवस्था को समझने का प्रयास कर रहा हूं।
ट्रस्ट के मार्गदर्शन में बनेगी आगे की रणनीति: जितेंद्र मिश्रा
उन्होंने कहा कि एक बार सब कुछ समझ में आ जाने के बाद मैं ट्रस्ट से आदेश और मार्गदर्शन लुंगा। अपनी टीम के सहयोग से हम आगे बढ़ेंगे। जैसे ही कोई योजना या रणनीति बनेगी, हम उसे आपके समक्ष रखेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व करने वाले मिश्रा को बुधवार को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ के रूप में नियुक्त किया गया था। अयोध्या में ट्रस्ट के न्यासियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें रिक्त न्यासी पदों को भरने 2025-26 के वार्षिक खातों की मंजूरी, कथित वित्तीय अनियमितताओं की एसआईटी जांच की प्रगति और सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई।
5 हजार आवेदकों में से चुने गए जितेंद्र मिश्रा
जीतेंद्र मिश्रा को सीईओ के चयन के लिए गठित समिति की सिफारिश पर नियुक्त किया गया। उन्हें भारतीय वायु सेना की विभिन्न शाखाओं में 39 वर्षों का अनुभव है और नेतृत्व का व्यापक अनुभव है। उन्हें उत्तम युद्ध सेवा पदक से भी सम्मानित किया गया है। राम जन्मभूमि मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन के लिए नियुक्त चयन समिति ने मंगलवार को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस प्रतिष्ठित पद के लिए 5,000 से अधिक आवेदकों के बीच कड़ी चयन प्रक्रिया हुई थी।
ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी बैठक में रहे मौजूद
रिपोर्ट एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान प्रस्तुत की गई, जिसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज, महंत दिनेंद्र दास, कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन और अयोध्या जिला मजिस्ट्रेट शशांक त्रिपाठी उपस्थित थे। तीन सदस्यीय चयन समिति में लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त), पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावरे और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली शामिल थे।
(इनपुट: ANI)
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