उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एससी-

अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को मिले समय पर न्याय और सुरक्षा: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

Justice and Security for All Affected Persons: CM Dhami

देहरादून (उत्तराखंड)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित न रहे। यह सुनिश्चित किया जाए कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उसका अधिकार मिले। इसके लिए मामलों की नियमित समीक्षा के साथ पूरी व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाया जाए।

<blockquote lang="hi" dir="ltr">सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में अधिकारियों को लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  

अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो साथ ही लंबे समय से लंबित एवं गंभीर प्रकृति के मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से प्रभावी कार्रवाई करें। अधिकारियों को निर्देश दिए प्रभावित परिवारों की सहायता केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार उन्हें चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य पात्र सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए। किसी घटना के कारण प्रभावित परिवार के बच्चों की पढ़ाई भी बाधित न हो।</p>&mdash; Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) <a href="https://x.com/pushkardhami/status/2102325574136148241?ref_src=twsrc%5Etfw">September 22, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

लंबित विवेचनाओं और मामलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक दर्ज मामलों में लंबित विवेचनाओं के कारणों की समीक्षा करते हुए प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। गंभीर मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग समन्वय से कार्रवाई करें। विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा के साथ पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

राहत राशि और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने पर जोर

पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में देरी न हो और जिन मामलों में विलंब हुआ है उनकी अलग से समीक्षा की जाए। सहायता केवल आर्थिक मदद तक सीमित न रहकर चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ी जाए। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और उन्हें छात्रवृत्ति दी जाए। हर जिले में मामलों की नियमित निगरानी के लिए वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।

डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश

पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को अधिनियम के प्रावधानों और पीड़ितों के साथ व्यवहार के लिए नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। मामलों की स्थिति और राहत राशि की शासन स्तर से निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी अधिकारों और सहायता के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में प्रस्तुत किए गए प्रमुख आंकड़े और उपस्थिति

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में 189, वर्ष 2025 में 157 और 2026 में 15 सितंबर तक 116 अभियोग पंजीकृत हुए, जिनमें 25 प्रकरण विवेचनाधीन हैं। वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये और 2026-27 में 18 सितंबर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता दी गई। बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें:   चीन के अंतरिक्ष स्टेशन पर मिशन में जल्द शामिल होंगे पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री: चीनी अधिकारी