कानपुर बनेगा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब यूपी में रक्षा उत्पादन को मिलेगी नई रफ्तार
कानपुर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। कानपुर में यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के अगले चरण को लेकर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें रक्षा उत्पादन के साथ रिसर्च, नई तकनीक, स्किल डेवलपमेंट और MSME को मजबूत करने पर मंथन हुआ। IIT कानपुर और BHU जैसे संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ रक्षा क्षेत्र को देने पर खास जोर दिया गया।
कानपुर को रक्षा निर्माण का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) और उत्तर प्रदेश सरकार की साझेदारी में आयोजित ‘कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप’ में कानपुर को देश के प्रमुख रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति पर चर्चा हुई। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि ‘पूर्व का मैनचेस्टर’ कहा जाने वाला कानपुर रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की क्षमता रखता है। कार्यशाला में सरकार, उद्योग, रक्षा क्षेत्र और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
IIT कानपुर और BHU की रिसर्च से बढ़ेगा इनोवेशन
सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि सरकार IIT कानपुर और BHU जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ मिलकर कॉरिडोर में विज्ञान, रिसर्च और नई तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र के लिए अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने के साथ स्थानीय उद्योगों को भी मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रक्षा उत्पादन की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
युवाओं के लिए तैयार होगी स्किल्ड वर्कफोर्स
डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के तन्मय तिवारी ने कानपुर में तेजी से बुनियादी ढांचा विकसित करने और युवाओं को जरूरी प्रशिक्षण देने की जरूरत बताई। IIT कानपुर और BHU की रिसर्च को ITI और स्थानीय संस्थानों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। उद्योगों के सहयोग से ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के अवसर बढ़ाए जाएंगे। इससे रक्षा क्षेत्र के लिए स्थानीय स्तर पर एक मजबूत और कुशल वर्कफोर्स तैयार होगी।
MSME के लिए आसान होगी रक्षा क्षेत्र में एंट्री
कार्यशाला में MSME के सामने आने वाली टेस्टिंग, क्वालिटी चेक, ट्रायल और सर्टिफिकेशन जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। भारतीय रक्षा निर्माता समाज के मेजर जनरल पी.के. सैनी ने बताया कि रक्षा खरीद प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों से स्थानीय उद्योगों के लिए रक्षा उपकरण और सामान बनाने में भागीदारी के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में ही डिजाइन और तकनीक विकसित करने पर जोर रहेगा।
विदेशी कंपनियों की भी बढ़ी दिलचस्पी
यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल की उदया अरुण ने कहा कि उद्योग जगत और निवेशक कानपुर को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कानपुर को डिफेंस कॉरिडोर के मजबूत केंद्रों में से एक बताया। TKMएस इंडिया के कमोडोर अनिल जय सिंह ने भी कहा कि भारत में मौजूद विदेशी रक्षा कंपनियां देश के बड़े बाजार को देखते हुए इस इकोसिस्टम का हिस्सा बनना चाहती हैं। इससे भविष्य में निवेश और तकनीकी सहयोग के अवसर बढ़ सकते हैं।
रक्षा के साथ नागरिक उद्योगों को भी मिलेगा फायदा
वर्कशॉप में ड्यूल-यूज और डीप-टेक तकनीक विकसित करने पर भी जोर दिया गया, जिनका इस्तेमाल रक्षा के साथ नागरिक उद्योगों में भी किया जा सकेगा। IIT कानपुर जैसे संस्थानों के सहयोग से विकसित तकनीकों से कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र को फायदा मिलने की उम्मीद है। कार्यशाला में बेहतर समन्वय के लिए एक अलग संस्थागत व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई। अब अगली कार्यशाला झांसी में और साल के अंत में लखनऊ में डिफेंस कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा।
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