चावला गोलीबारी मामले में हाजी वसीम को राहत, कड़कड़डूमा कोर्ट ने दी जमानत
नई दिल्ली: दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने शुक्रवार को वसीम उर्फ हाजी वसीम को जमानत दे दी, जो कपिल सागवान उर्फ नंदू का कथित करीबी सहयोगी है और चावला इलाके में गोलीबारी के मामले में वांछित है। आरोप है कि हाजी वसीम ने नंदू गिरोह के हमलावरों को अवैध हथियार मुहैया कराए थे और वह नंदू के नियमित संपर्क में था, जो फरार है और कथित तौर पर ब्रिटेन में है। उसे 24 अगस्त को एक मुठभेड़ के बाद क्राइम ब्रांच ने मयूर विहार इलाके से गिरफ्तार किया था। वह उत्तर प्रदेश के मेरठ के लीसादी गेट का निवासी है। वह शाहरुख पठान से जुड़े उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के एक मामले में भी आरोपी था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) बबीता पुनिया ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रस्तुत दलीलों और जवाब पर विचार करने के बाद वसीम उर्फ हाजी वसीम को जमानत दी।
अदालत ने वसीम को दी जमानत
अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि कथित गोलीबारी में किसी भी पुलिस अधिकारी के घायल होने की कोई जानकारी नहीं है। जवाब में घटनास्थल से किसी भी खाली कारतूस के बरामदगी का खुलासा नहीं किया गया। अदालत ने यह भी गौर किया कि जवाब में ही आवेदक पर नुकसान पहुंचाने और पुलिस दल को बाधा पहुंचाने का इरादा रखने का आरोप लगाया गया था। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास) के तत्व सिद्ध होते हैं या नहीं, यह मुकदमे के दौरान तय किया जाएगा। 16 अक्टूबर को एएसजे पुनिया ने आदेश दिया, उपरोक्त के मद्देनजर, आवेदक वसीम उर्फ हाजी वसीम को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानती पेश करने पर जमानत दी जाती है।
अदालत ने जमानत पर लगाईं सख्त शर्तें
जमानत कुछ शर्तों के अधीन दी गई, जिनमें यह शर्त भी शामिल है कि आवेदक अदालत की पूर्व अनुमति के बिना दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र नहीं छोड़ेगा। वह सुनवाई की प्रत्येक तिथि पर अदालत के समक्ष उपस्थित होगा और किसी भी गवाह से संपर्क, धमकी या उसे प्रभावित नहीं करेगा और न ही किसी भी तरह से सबूतों के साथ छेड़छाड़ करेगा। हाजी वसीम की ओर से पेश हुए वकील भानु मल्होत्रा ने तर्क दिया कि व्यस्त मुख्य सड़क पर कथित मुठभेड़ होने के बावजूद, कोई स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह पेश नहीं किया गया। कोई सीसीटीवी फुटेज एकत्र नहीं किया गया था और तलाशी और जब्ती की कोई वीडियोग्राफी नहीं की गई थी।
एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार
आगे यह तर्क दिया गया कि किसी भी पुलिस अधिकारी को कोई चोट नहीं आई। पुलिस का दावा है कि उन्होंने केवल हवा में गोली चलाई थी। हालांकि हथियार को अर्ध-स्वचालित बताया गया था, लेकिन घटनास्थल से कोई खाली कारतूस बरामद नहीं हुआ था। फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट का अभी इंतजार था। अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, क्योंकि मामला गिरफ्तारी के दौरान पुलिस दल के खिलाफ अवैध हथियार के इस्तेमाल से संबंधित है। आरोपी अन्य आपराधिक मामलों में भी संलिप्त था, हथियार का स्रोत अभी तक पता नहीं चल पाया है और सह-आरोपियों से अभी पूछताछ बाकी है। एपीपी ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
(इनपुट: ANI)
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