प्रियांक खर्गे का RSS-BJP पर हमला, बोले- भाषा बदलने से विचारधारा नहीं बदलेगी
बेंगलुरु: कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खर्गे ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाषा बदलने से उनकी विचारधारा नहीं बदलेगी। खर्गे ने कहा कि RSS और भाजपा अपनी शब्दावली को बहुत तेजी से अपडेट कर रहे हैं, लेकिन आरोप लगाया कि वे लोगों को बांटना, युवाओं को गुमराह करना और नफरत को नए रूप में पेश करना जारी रखे हुए हैं।
RSS और भाजपा अपनी शब्दावली को कर रहे अपडेट
उनकी यह टिप्पणी RSS प्रमुख मोहन भगवत द्वारा मुंबई के नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र (NMACC) में आयोजित एक सत्र में Gen Z और Gen Alpha के साथ बातचीत करने के एक दिन बाद आई है। कर्नाटक के मंत्री ने एक पोस्ट में लिखा, RSS और भाजपा अपनी शब्दावली को बेतहाशा अपडेट कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इससे उनकी विचारधारा नहीं बदलेगी। सच्चाई वही है- लोगों को बांटना, युवाओं को गुमराह करना और नफरत को नए रूप में पेश करना। वही संघ, बस बोलचाल का तरीका अलग है।
आरक्षण नीतियों पर अपना दृष्टिकोण किया स्पष्ट
युवा संवाद सम्मेलन को संबोधित करते हुए भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि समाज से सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म होने तक आरक्षण नीतियां सक्रिय रहनी चाहिए। उन्होंने बी.आर. अंबेडकर के मूल सिद्धांतों का हवाला देते हुए आरक्षण नीतियों पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया और कहा कि आरक्षण सामाजिक कारणों से ही मौजूद है। नीतिगत ढांचों का मूल्यांकन ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों के आधार पर किया जाना चाहिए, इस बात पर बल देते हुए भागवत ने संविधान के निर्माता बी.आर. अंबेडकर द्वारा निर्धारित संरचनात्मक दृष्टिकोण की ओर ध्यान दिलाया।
सामाजिक कारणों से ही मौजूद है आरक्षण
उन्होंने कहा कि वर्गीकरण की बढ़ती मांग और हाल के न्यायिक संकेत आरक्षण लाभों के वितरण में एक स्वाभाविक बदलाव का संकेत देते हैं। उन्होंने कहा, मैं डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के आरक्षण संबंधी विचारों पर प्रकाश डालूंगा। अगर हम ईमानदारी से उनकी सलाह का पालन करें, तो कोई समस्या नहीं है। आरक्षण सामाजिक कारणों से ही मौजूद है। जब तक सामाजिक भेदभाव रहेगा, आरक्षण जारी रहेगा। जिन लोगों को इसका लाभ मिला है, उन्हें इसे आगे बढ़ाना चाहिए।
विभिन्न क्षेत्रों में आंतरिक कोटा विभाजन को लेकर बढ़ रहीं चर्चाएं
भागवत ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में आंतरिक कोटा विभाजन को लेकर चर्चाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने जन मांगों के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा, कुछ आवाज़ें उठने लगी हैं कि उन्हें कोटा मिला, उन्हें लाभ हुआ और अब यह दूसरों को भी मिलना चाहिए। कुछ राज्यों में कोटा के वर्गीकरण की मांग भी उठी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर टिप्पणी की थी।
(इनपुट: ANI)
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