कर्नाटक SIR-2026 विवाद: प्रकाश राज और नागरिक संगठनों का 'इलेक्शन कमीशन चलो' अभियान
बेंगलुरु (कर्नाटक)। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 को लेकर उपजा विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर सड़क और अदालत की दहलीज तक पहुंच गया है। अभिनेता-फिल्मकार प्रकाश राज ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि राज्य के नागरिक समाज संगठन 1 सितंबर को बेंगलुरु में ‘Election Commission Chalo’ अभियान के तहत बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे और इस पूरी प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
SIR पर प्रकाश राज ने क्यों उठाए सवाल?
बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रकाश राज ने कहा कि SIR शुरू होने से पहले ही चुनाव आयोग के चयन की प्रक्रिया लोकतांत्रिक नहीं थी। उन्होंने कहा, "जब सत्तारूढ़ दल के दो सदस्य और विपक्ष का केवल एक सदस्य हो, तो इसमें लोकतंत्र कहां है?" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने संसद में चुनाव आयोग को न्यायिक सुरक्षा देने का फैसला किया, जिसके तहत किसी अधिकारी के खिलाफ जीवनभर कोई मामला दर्ज नहीं किया जा सकेगा।
प्रकाश राज ने कहा, "लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायिक सुरक्षा आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए होती है। इसे पूरे संगठन तक क्यों बढ़ाया जाए? इससे ऐसी स्थिति बनती है जहां उन्हें लगता है कि वे जवाबदेही के बिना कुछ भी कर सकते हैं।"
‘हर मतदाता को अदालतों के चक्कर क्यों लगाने पड़ें?’
प्रकाश राज ने SIR की समयसीमा और इसकी जरूरत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में अभी चुनाव में करीब दो साल बाकी हैं, ऐसे में प्रक्रिया को महज एक महीने में पूरा करने की क्या जरूरत थी। उन्होंने सवाल किया, "इस देश के मतदाता और नागरिक को आखिर कितने साल तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ेंगे? आप देश के हर मतदाता को इतनी परेशानी से क्यों गुजार रहे हैं? और कर्नाटक में अभी दो साल बाकी हैं; यह कोई आपात स्थिति नहीं है। इसे सिर्फ एक महीने में करने की क्या जरूरत थी?"
उनका कहना था कि जिन मतदाताओं को अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित होने के रूप में चिह्नित किया गया है, उन्हें सीधे सूची से हटाने के बजाय अपनी पात्रता साबित करने का उचित अवसर मिलना चाहिए। प्रकाश राज ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि ऐसे मतदाताओं से दोबारा पंजीकरण के लिए Form 6 के जरिए नामांकन करने को कहा जा रहा है।
कर्नाटक में SIR के बाद जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
प्रकाश राज का यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोमवार को SIR-2026 के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की है। यह ड्राफ्ट सूची 30 जून से 17 अगस्त 2026 के बीच चले Enumeration Process के बाद जारी की गई। इस दौरान पूरे राज्य में Booth Level Officers (BLOs) ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया। CEO कार्यालय के मुताबिक, ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 4,46,35,975 मतदाता शामिल हैं। इनमें 2,24,73,864 महिला, 2,21,59,240 पुरुष और 2,871 थर्ड-जेंडर मतदाता हैं। सूची में 44,176 Service Electors और 18-19 वर्ष आयु वर्ग के 3,70,341 युवा मतदाता भी शामिल हैं।
1.07 करोड़ प्रविष्टियां ASDDO श्रेणी में
Enumeration के दौरान कुल 1,07,96,339 प्रविष्टियों, यानी कुल प्रविष्टियों के 19.48 प्रतिशत, को ASDDO श्रेणियों में चिह्नित किया गया। ASDDO में Absent, Shifted, Dead, Duplicate और Others श्रेणियां शामिल हैं। यानी इन प्रविष्टियों को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट या अन्य कारणों से अलग श्रेणी में रखा गया है। इसके बाद करीब 4.46 करोड़ मतदाताओं को सक्रिय मतदाता आधार के रूप में बरकरार रखा गया है। हालांकि, इसी समूह में 20.35 लाख मतदाताओं को विसंगतियों (Anomalies) के लिए चिह्नित किया गया है। इसके अलावा 23.45 लाख मतदाताओं को NoMapping श्रेणी में रखा गया है।
43.8 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस
CEO कार्यालय के अनुसार, Anomalies और NoMapping—इन दोनों श्रेणियों में शामिल कुल 43.8 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे। इन मतदाताओं से अपनी पात्रता की पुष्टि करने और अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल रखने के लिए जवाब मांगा जाएगा। यानी ड्राफ्ट सूची में किसी प्रविष्टि को चिह्नित किया जाना अपने आप में अंतिम रूप से नाम हटाए जाने के बराबर नहीं है। यही वह प्रक्रिया है जिस पर प्रकाश राज और नागरिक समाज संगठनों की आपत्ति है। उनका तर्क है कि मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने का पर्याप्त और निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।
कब तक दर्ज करा सकते हैं दावा और आपत्ति?
SIR-2026 के लिए 1 अक्टूबर 2026 को qualifying date तय की गई है। ड्राफ्ट मतदाता सूची के खिलाफ दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 24 अगस्त से 23 सितंबर 2026 तक चलेगी। इसके बाद 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। CEO कार्यालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे ड्राफ्ट सूची में अपने नाम और विवरण की जांच करें। यदि किसी जानकारी में गलती है या नाम को लेकर आपत्ति है, तो निर्धारित समयसीमा के भीतर दावा या आपत्ति दाखिल की जाए। नागरिक ड्राफ्ट मतदाता सूची को CEO Karnataka की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए देख सकते हैं और आवश्यक जानकारी का सत्यापन या अपडेट करा सकते हैं।
1 सितंबर को क्या होगा?
नागरिक समाज संगठनों ने SIR के खिलाफ 1 सितंबर को बेंगलुरु में ‘Election Commission Chalo’ अभियान की घोषणा की है। इसके साथ ही समूह अदालतों का दरवाजा खटखटाकर SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करने की तैयारी में हैं। इसके तरीके, मतदाता अधिकार और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर नागरिक संगठनों की आपत्तियां इसे एक व्यापक राजनीतिक और कानूनी मुद्दे में बदल रही हैं। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: खड़गे का केंद्र पर हमला, 1.95 लाख कंटेंट ब्लॉकिंग आदेश जारी करने का दावा