खजुराहो-पन्ना रेल लाइन परियोजना में रेलवे ने ₹24.7

खजुराहो-पन्ना रेल लाइन का बदला रूट, करोड़ों खर्च के बाद बदला गया रूट

फाइल फोटो

छतरपुर (मध्य प्रदेश)। खजुराहो-पन्ना रेल लाइन परियोजना में रेलवे अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। रेलवे ने जिस रूट पर लाइन बिछाने के लिए पहले ₹24.78 करोड़ खर्च कर 54,578 पेड़ कटवा दिए, अब उसी रूट को बदल दिया गया है। रेलवे का कहना है कि पुराने डिजाइन में 6 बड़े मोड़ थे, जहां ट्रेन संचालन असुरक्षित था।

रेलवे ने यह फाइनल किया था

मालूम हो कि ललितपुर-सिंगरौली परियोजना के तहत खजुराहो से पन्ना को जोड़ने वाली यह रेल लाइन पहाड़ियों और अजयगढ़ घाटी के बीच से गुजरनी है। रेलवे ने 2021 में रूट डिजाइन फाइनल किया था। फिर 315 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई और 2022-23 में जंगल में लगे 54,578 पेड़ काटे गए। अब रेलवे ने पुराना डिजाइन बदल दिया है। नए रूट के लिए 286 हेक्टेयर जंगल के दोबारा अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वन विभाग ने नए इलाके में पेड़ों की गिनती शुरू कर दी है। अनुमान है कि 50 हजार और पेड़ कटेंगे।

रेल लाइन के लिए पहाड़ कटेंगे

रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर शशांक साहू के मुताबिक, नए डिजाइन में मोड़ों का घुमाव कम किया है। पहले 8 सुरंगें प्रस्तावित थीं, अब 7 सुरंगें और 10 पुल बनाए जाएंगे। रेल लाइन के लिए पहाड़ काटे जाएंगे। इसका मलबा रेलवे जंगल में डंप करना चाहता है, पर पन्ना टाइगर रिजर्व ने इसका विरोध किया है। टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत सोनकर ने रेलवे को पत्र लिखकर कहा है कि मलबा जंगल के बाहर ही फेंका जाए।

अब सवालों का अंबार

जब 2021 में डिजाइन फाइनल हुआ था, तब यह खामी क्यों नहीं पकड़ी? अगर पुराना रूट इतना जोखिम भरा था तो हजारों पेड़ कटवाने व करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद बदलाव क्यों किया? गलत डिजाइन का नुकसान अब पर्यावरण और सरकारी खजाने दोनों को उठाना पड़ रहा है। नए रूट के लिए निजी एजेंसियों से दोबारा सर्वे कराया गया। परियोजना 3 साल पीछे चली गई, लागत बढ़ रही है। किसी अफसर की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई?

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