औरंगाबाद सिविल कोर्ट ने नाबालिग के अपहरण, हत्या और

11 साल पुराने अपहरण-हत्या केस में औरंगाबाद कोर्ट ने आरोपी को सुनाई उम्रकैद की सजा

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औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद में नाबालिग लड़के के अपहरण के बाद हत्या में सिविल कोर्ट औरंगाबाद के प्रधान जिला जज राजीव रंजन कुमार ने रिसियप थाना की एक मामले में सज़ा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए एक मात्र प्राथमिक अभियुक्त को सज़ा सुनाई है। लोक अभियोजक अजय कुमार ने बताया कि प्राथमिक अभियुक्त रिसियप थाना क्षेत्र के गडरा सुरेंद्र मेहता को भादंवि धारा- 364 में उम्रकैद और एक लाख रुपये का जुर्माना, धारा- 302 में उम्रकैद दो लाख रुपये का जुर्माना और भादंवि धारा- 201 में पांच साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। 

बारात में से किया अपहरण

अधिवक्ता ने बताया कि 10 जुलाई को एक नाबालिग बच्चे का अपहरण कर हत्या करने और साक्ष्य छिपाने के आरोप में दोषी करार देते हुए बॉन्ड पत्र विखंडित कर जेल भेज दिया गया था। लोक अभियोजक ने बताया कि प्राथमिकी सूचक महेंद्र मेहता ने 17 जून 2011 को अभियुक्त पर नाबालिग विवेक कुमार के अपहरण करने का आरोप लगाया था। उस दिन गांव में एक बारात आई थी, जिसमें विवेक बराती संग सो गया था। वहीं से अभियुक्त ने उसका अपहरण कर लिया। 

घटना के तीन महीने बाद मिला शव

किडनैप नाबालिग का शव घटना के तीन महीने बाद सिंचाई नहर से बरामद किया गया। परिजनों ने शर्ट बेल्ट और दांत से मृत बच्चे की पहचान किया। वाद सूचक का अभियुक्त से पूर्व में जमीनी विवाद था। इस बहुचर्चित मामले में सज़ा सुनाई जाने के बाद पीड़ित परिजनों ने कोर्ट के फैसले पर संतोष जताया है। 

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