बांधवगढ़ में कृष्ण जन्माष्टमी पर श्री राम जानकी मं

इस मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्रीराम को कान्हा और माता सीता को राधारानी मानकर होती है पूजा

कृष्ण जन्माष्टमी पर यहां होती है अनोखी पूजा

उमरिया: देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, लेकिन उमरिया के बांधवगढ़ में इस पर्व की परंपरा अनोखी है। बाघों के साम्राज्य के बीच पहाड़ की चोटी पर स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने श्री राम जानकी मंदिर के पट साल में केवल एक दिन जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। यहां भगवान श्रीराम को कान्हा और माता सीता को राधारानी के स्वरूप में पूजने की परंपरा है।

सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं का प्रवेश रहता है प्रतिबंधित

ताला गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर घने जंगल और ऊंची पहाड़ी पर स्थित बांधवगढ़ किला और बंधवाधीश मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। सामान्य दिनों में यहां श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहता है। जन्माष्टमी पर विशेष अनुमति के साथ मंदिर तक पहुंचने का अवसर मिलता है। जंगल, पहाड़ और प्राचीन मंदिर का यह संगम श्रद्धालुओं के लिए रोमांच और आस्था का अनूठा अनुभव बन जाता है।

बांधवगढ़ में बघेल राजाओं का रहा शासन

लाल बहादुर सिंह बघेल के अनुसार, बांधवगढ़ में बघेल राजाओं का शासन रहा है। तत्कालीन महाराजा मार्तंड सिंह ने बांधवगढ़ का क्षेत्र टाइगर रिजर्व के लिए मध्य प्रदेश शासन को दान किया था। बताया जाता है कि उन्होंने शर्त रखी थी कि जन्माष्टमी का पारंपरिक मेला और धार्मिक आयोजन जारी रहेगा। इसी परंपरा के कारण आज भी साल में एक दिन श्रद्धालुओं को किले तक जाने की अनुमति मिलती है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, बच्चों-बुजुर्गों को पहाड़ी मंदिर में प्रवेश नहीं

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की क्षेत्रीय संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि मेले के दौरान करीब 135 अधिकारी-कर्मचारी और श्रमिक तैनात रहेंगे। 29 ड्यूटी प्वाइंट और छह जिप्सी वाहन संवेदनशील स्थानों पर रहेंगे। हाथियों से भी गश्त होगी। ताला गेट पर चिकित्सा दल और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। 12 साल से कम बच्चों और 65 वर्ष से अधिक बुजुर्गों को पहाड़ी मंदिर क्षेत्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उनके लिए ताला गेट पर बड़ी स्क्रीन से दर्शन की व्यवस्था रहेगी। 

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