इंदौर। मध्य प्रदेश की 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' को ले

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लाडली लक्ष्मी योजना के क्रियान्वयन पर उठाए गंभीर सवाल

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लाडली लक्ष्मी योजना के क्रियान्वयन पर उठाए गंभीर सवाल

इंदौर। मध्य प्रदेश की 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' को लेकर हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने एक रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान (SuoMotu) लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है कि आखिर योजना का लाभ लेने वाली हजारों बेटियां कॉलेज स्तर तक क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं।

हैरान करने वाले आंकड़े

कोर्ट के संज्ञान में यह बात आई है कि योजना के तहत पंजीकृत लगभग 40,000 से अधिक बच्चियों में से केवल 1,477 ही कॉलेज तक पहुंच पाई हैं। यह संख्या कुल लाभार्थियों के मुकाबले बहुत कम है।

कोर्ट ने पूछा

हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि, "जनता के टैक्स का पैसा बच्चियों को आगे बढ़ाने के लिए खर्च किया जा रहा है, इसके बावजूद वे उच्च शिक्षा (कॉलेज) तक नहीं पहुंच रही हैं, यह गंभीर चिंता का विषय है।"

सरकार ने क्या कहा?

कोर्ट ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर पूछा है कि स्कूल से कॉलेज के बीच बच्चियों के ड्रॉपआउट (पढ़ाई छोड़ने) का क्या कारण है।

अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी

19 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए कोर्ट से और समय मांगा है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है।

योजना का उद्देश्य और चिंता

लाड़ली लक्ष्मी योजना का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह रोकना और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देना है। सरकार ने हाल ही में 'लाड़ली लक्ष्मी 2.0' के तहत कॉलेज जाने वाली बेटियों के लिए ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया है। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर कॉलेज पहुंचने वाली बेटियों की इतनी कम संख्या योजना की सफलता पर सवाल खड़े करती है। कोर्ट ने इसे केवल एक वित्तीय योजना न मानकर बेटियों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा मामला माना है।

यह भी पढ़ें : https://www.primenewsnetwork.in/india/surgical-scissors-left-in-womans-stomach-for-5-years/144686