मध्यप्रदेश : SRLM पोर्टल का आदेश जारी स्व-सहायता समूहों ने खोली व्यवस्था की पोल
शिवपुरी जिले के सभी आठ विकासखंडों में मध्यान्ह भोजन और सांझा चूल्हा योजना का संचालन कर रही महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचीं। यहां उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया। महिलाओं का कहना था कि लंबे समय से कई मुद्दों का समाधान नहीं हो पाया है, जिससे समूहों को आर्थिक और प्रशासनिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बंद पोर्टल पर पंजीयन कराने का दबाव
महिला समूहों ने ज्ञापन में बताया कि जिला पंचायत के आदेशानुसार उन्हें SRLM पोर्टल पर पंजीयन कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। जबकि संबंधित पोर्टल वर्तमान में बंद है और उस पर पंजीयन की प्रक्रिया संभव नहीं है। समूहों का आरोप है कि इसके बावजूद उन पर लगातार पंजीयन कराने का दबाव बनाया जा रहा है। महिलाओं ने मांग की कि जब तक पोर्टल दोबारा चालू नहीं हो जाता, तब तक इस आदेश पर रोक लगाई जाए।
पंजियन के नाम पर रुपए मांगने का आरोप
महिला समूहों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ कर्मचारी पंजीयन प्रक्रिया के नाम पर उनसे 10-10 हजार रुपए की मांग कर रहे हैं। महिलाओं ने इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह पहले ही आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में इस तरह की मांगें उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही हैं।
फरवरी से लंबित है भुगतान और मानदेय
ज्ञापन में बताया गया कि फरवरी माह से मध्यान्ह भोजन योजना की राशि का भुगतान नहीं हुआ है। इसके साथ ही रसोइयों का मानदेय भी कई महीनों से लंबित है। महिलाओं का कहना है कि भुगतान नहीं मिलने के कारण उन्हें उधार लेकर भोजन व्यवस्था संचालित करनी पड़ रही है। इससे कई समूह आर्थिक संकट में आ गए हैं और कई महिलाएं कर्जदार हो चुकी हैं।
फरवरी से लंबित है भुगतान और मानदेय
ज्ञापन में बताया गया कि फरवरी माह से मध्यान्ह भोजन योजना की राशि का भुगतान नहीं हुआ है। इसके साथ ही रसोइयों का मानदेय भी कई महीनों से लंबित है। महिलाओं का कहना है कि भुगतान नहीं मिलने के कारण उन्हें उधार लेकर भोजन व्यवस्था संचालित करनी पड़ रही है। इससे कई समूह आर्थिक संकट में आ गए हैं और कई महिलाएं कर्जदार हो चुकी हैं।
सांझा चूल्हा योजना में भी उठाए सवाल
सांझा चूल्हा योजना से जुड़ी महिलाओं ने खाद्यान्न वितरण प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर सेल्समैन स्वयं फिंगरप्रिंट का उपयोग कर खाद्यान्न उठा लेते हैं और बाद में समूहों को खाद्यान्न उपलब्ध नहीं होने की बात कह दी जाती है। महिलाओं ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की।
अध्यक्ष और सचिव के फिंगरप्रिंट अनिवार्य करने की मांग
महिला समूहों ने मांग की कि खाद्यान्न वितरण के दौरान समूह के अध्यक्ष और सचिव के फिंगरप्रिंट को अनिवार्य किया जाए। उनका कहना है कि इससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या विवाद की संभावना कम होगी और खाद्यान्न सीधे पात्र समूहों तक पहुंचेगा।जिला अध्यक्ष रूबी पाराशर ने कलेक्टर से सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिला समूह लंबे समय से इन समस्याओं से जूझ रहे हैं और अब स्थिति गंभीर होती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भुगतान, खाद्यान्न आपूर्ति और पंजीयन से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो जिलेभर के महिला स्व-सहायता समूह आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।