मध्य प्रदेश के बानमोर में एक परिवार ने आरोप लगाया

'न नौकरी, न जमीन', फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में निकला कर्मचारी, पीड़ित ने उठाए सवाल

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मुरैना: मध्य प्रदेश में गरीब कल्याण योजनाओं को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बानमोर नगर परिषद पर एक परिवार ने आरोप लगाया है कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें सरकारी कर्मचारी और एक हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि का मालिक दर्शा दिया गया, जबकि उनका दावा है कि उनके पास न सरकारी नौकरी है और न ही इतनी कृषि भूमि।

पिछले 15 वर्ष से लड़ रहे अपने अधिकारों की लड़ाई 

वार्ड-11 फूलगंज निवासी अशोक कुमार शर्मा का कहना है कि वे पिछले 15 वर्षों से अपने अधिकारों के लिए सरकारी कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालय, सीएम हेल्पलाइन और न्यायालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल सका। पीड़ित के अनुसार, SDM मुरैना ने उन्हें पात्र माना, लेकिन नगर परिषद बानमोर ने अपने पत्र क्रमांक 2026/1137 दिनांक 08 जुलाई 2026 में उन्हें सरकारी कर्मचारी और एक हेक्टेयर से अधिक भूमि का मालिक बताते हुए रिपोर्ट भेज दी। उनका आरोप है कि इसी कथित गलत जानकारी के कारण वे कई सरकारी योजनाओं से वंचित रह गए।

अशोक कुमार शर्मा ने प्रशासन से पूछा सवाल

उन्होंने प्रशासन से सवाल करते हुए पूछा है कि अगर मैं गरीब हूं, तो मुझे सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिला? अगर मैं सरकारी कर्मचारी और करोड़ों की जमीन का मालिक हूं, तो उसका प्रमाण और लाभ कहां है? जब "प्रधानमंत्री आवास योजना" के लिए कहा गया कि मैं नगर परिषद क्षेत्र का निवासी नहीं हूं, तो 35 वर्षों से "जल" कर और हाउस टैक्स किस आधार पर वसूला गया। 

उच्च न्यायलय का खटखटाएंगे दरवाजा

पीड़ित ने नगर परिषद को 7 दिन का समय देते हुए कथित तथ्यों का प्रमाण मांगा है। उनका कहना है कि अगर अधिकारी अपने दावों को साबित नहीं कर सकते, तो गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अशोक कुमार शर्मा ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे उच्च स्तर पर शिकायत करने के साथ-साथ न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे। 

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