विंध्य क्षेत्र में बदलेगी तस्वीर, देश की सबसे लंबी वाटर टनल से लाखों किसानों को मिलेगा लाभ
स्लीमनाबाद: मध्यप्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग का खुदाई कार्य आखिरकार पूरा हो गया है। करीब 15 साल बाद 11.952 किलोमीटर लंबी इस ऐतिहासिक वाटर टनल में टनल बोरिंग मशीन अंतिम छोर तक पहुंच गई है। अब नर्मदा का पानी बिना किसी पंप के प्राकृतिक बहाव से सोन बेसिन तक पहुंचेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से कटनी समेत पांच जिलों की करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी, जबकि कटनी शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों को भी नर्मदा का पेयजल मिलेगा।
देश की सबसे लंबी वाटर टनल
बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत दाईं तट मुख्य नहर पर बनी यह 11.952 किलोमीटर लंबी सुरंग देश की सबसे लंबी वाटर टनल है। इसका निर्माण वर्ष 2011 में शुरू हुआ था और करीब डेढ़ दशक बाद खुदाई का काम पूरा हुआ है। टनल का व्यास 10.14 मीटर है, जबकि आगे 116.865 से 129 किलोमीटर तक ओपन कैनाल बनाई गई है। परियोजना की वर्तमान लागत 1600 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।
विंध्य क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगी यह टनल
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अनुसार, यह टनल विंध्य क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगी। इससे कटनी जिले की 21,823 हेक्टेयर, मैहर की 54,227 हेक्टेयर, सतना की 1,04,970 हेक्टेयर, पन्ना की 448 हेक्टेयर और रीवा की 3,084 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। साथ ही कटनी शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को नर्मदा का पेयजल भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इस परियोजना से किसानों की बढ़ेगी आय
प्रदेश की सबसे अधिक 227 क्यूमेक जल वहन क्षमता वाली बरगी दाईं तट मुख्य नहर के जरिए नर्मदा का पानी प्राकृतिक बहाव से सोन बेसिन तक पहुंचेगा। अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से किसानों की आय बढ़ेगी, खेती को नई मजबूती मिलेगी और पूरे विंध्य क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। स्लीमनाबाद की यह ऐतिहासिक सुरंग अब सिर्फ एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि विंध्य के लाखों किसानों के लिए नई उम्मीद बन गई है। वर्षों के इंतजार के बाद नर्मदा का पानी अब खेतों और लोगों के घरों तक पहुंचने की तैयारी में है।
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