राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन प

मप्र को दो टूक- सिर्फ ड्राइवर नहीं, रेत माफिया के ‘बड़े खिलाड़ी’ को भी पकड़ो.

Wildlife Conservation

भोपाल/नई दिल्ली। ​राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मध्य प्रदेश सरकार को सख्त संकेत दिए। कोर्ट ने कहा, कार्रवाई सिर्फ ट्रकों के ड्राइवरों और हेल्परों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अवैध खनन में शामिल ‘बड़ी मछलियों’ तक पहुंचना जरूरी है। अवैध रेत खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है।

26 मई को जारी होंगे आदेश

बुधवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की ओर से अदालत के आदेशों के पालन पर सुनवाई की। कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा कि 26 मई को आदेश जारी किया जाएगा।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, निगरानी बढ़ाई गई है

​मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि जंगल क्षेत्रों में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों की निगरानी बढ़ाई गई है। कई वाहनों के चालान काटे गए हैं और अवैध खनन रोकने के लिए लगातार कार्रवाई हो रही है।

मुख्य आरोपियों तक पहुंचना अधिक जरूरी

​इस पर कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ड्राइवरों और हेल्परों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध खनन में शामिल बड़े नेटवर्क और मुख्य आरोपियों तक पहुंचना ज्यादा जरूरी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि तीनों राज्यों ने बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों की पहचान, जीपीएस सिस्टम और हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने का रोडमैप पेश किया है।

सीसीटीवी लगाने के निर्देश दिये थे

सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल को तीनों राज्यों को अवैध रेत खनन वाले रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा कि संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र में हो रही गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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