महाराष्ट्र FDA ने भ्रामक ब्रांडिंग पर लिया एक्शन, Aciloc 150+ और 300+ के स्टॉक किए जब्त
महाराष्ट्र: "सुरक्षित भोजन, सुरक्षित दवाइयां, सुरक्षित महाराष्ट्र" अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भ्रामक लेबलिंग और ब्रांडिंग संबंधी चिंताओं के चलते लगभग 2.45 करोड़ रुपये मूल्य के Aciloc 150+ और Aciloc 300+ के स्टॉक जब्त कर लिए हैं। इसके साथ ही ब्रांड के पूर्णतः बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया है।
शनिवार को जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया...
शनिवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह कार्रवाई अमरावती में एक नियमित निरीक्षण के बाद की गई है, जहां यह पाया गया कि अहमदाबाद स्थित कैडिला फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड को लंबे समय से Aciloc 150 और Aciloc 300 के निर्माण और विपणन का लाइसेंस प्राप्त था, जिनमें सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक (API) के रूप में रैनिटिडाइन शामिल है।
मार्केटिंग से पहले उत्पाद के नाम में जोड़ा गया एक प्लस चिह्न
हालांकि, कंपनी ने हाल ही में Aciloc 150+ और Aciloc 300+ को बाजार में उतारा है, जिनमें रैनिटिडाइन को फैमोटिडाइन से बदल दिया गया है, जो एक पूरी तरह से भिन्न सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक है। इस बड़े बदलाव के बावजूद, कंपनी ने लगभग एक जैसी ब्रांडिंग और लेबल डिज़ाइन को बरकरार रखा। बस दवाइयों की मार्केटिंग से पहले उत्पाद के नाम में एक "+" (प्लस) चिह्न जोड़ दिया। जांच में यह भी पता चला कि रैनिटिडाइन पर आधारित पुरानी एसीलोक और फैमोटिडाइन पर आधारित नई एसीलोक प्लस दोनों उत्पाद एक साथ बाजार में उपलब्ध थे। ब्रांड नामों में इस तरह की समानता डॉक्टर्स, फार्मासिस्ट्स और मरीजों के बीच भ्रम पैदा कर सकती है, जिससे गलत दवा दिए जाने या सेवन किए जाने का खतरा बढ़ जाता है।
इन दवाओं की बिक्री पर लगाई गई रोक
नियामक दिशानिर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब किसी ब्रांडेड दवा के सक्रिय घटक या संरचना में बदलाव किया जाता है, तो संशोधित उत्पाद को उसी या भ्रामक रूप से मिलते-जुलते ब्रांड नाम से बाजार में नहीं बेचा जाना चाहिए। तदनुसार, एफडीए ने तुरंत पुणे, नागपुर और भिवंडी (ठाणे) में कंपनी के कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग एजेंट (सीएफए) गोदामों का निरीक्षण किया। 9 और 10 जुलाई, 2026 को एसीलोक 150+ और एसीलोक 300+ के पूरे उपलब्ध स्टॉक, जिसकी कीमत 2,45,37,490 रुपये थी, उसकी बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी गई।
बाजार में इन दवाओं को वापस लाने के दिए गए निर्देश
जन स्वास्थ्य और रोगी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, एफडीए ने यह एहतियाती कदम उठाया है, क्योंकि भ्रामक रूप से मिलते-जुलते ब्रांड नामों के कारण रोगियों को गलत दवा मिल सकती है। कंपनी को एसीलोक 150, एसीलोक 150 प्लस, एसीलोक 300 और एसीलोक 300 प्लस के स्टॉक को तुरंत बाजार से वापस मंगवाने का निर्देश दिया गया है। आगे की जांच जारी है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंधे ने कहा...
इस कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंधे ने कहा, किसी दवा के ब्रांड नाम के कारण मरीजों, डॉक्टर्स या फार्मासिस्ट्स के बीच होने वाली कोई भी गलतफहमी, जिसके परिणामस्वरूप गलत दवा दी जाती है, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। दवा ब्रांडिंग, लेबलिंग और मार्केटिंग से संबंधित नियमों का अनुपालन, रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, सर्वोपरि होना चाहिए। सुरक्षित दवाएं प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार हैं, और उस अधिकार की रक्षा करना हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है।"
प्रशासन ने नागरिकों और चिकित्सा पेशेवरों के लिए जारी की एक सलाह
प्रशासन ने नागरिकों और चिकित्सा पेशेवरों के लिए एक सलाह भी जारी की है, जिसमें उनसे किसी भी दवा को निर्धारित करने, वितरित करने या सेवन करने से पहले ब्रांड नाम और सक्रिय औषधीय घटक दोनों की पुष्टि करने का आग्रह किया गया है। मरीजों को सलाह दी गई है कि वे समान या भ्रामक रूप से मिलते-जुलते ब्रांड नामों वाली दवाओं के मामले में विशेष सावधानी बरतें और किसी भी प्रकार की अनिश्चितता होने पर फार्मासिस्ट से परामर्श लें। प्रशासन ने नागरिकों से यह भी आग्रह किया है कि अगर समान दवा नामों के कारण कोई भ्रम उत्पन्न होता है या कोई संदिग्ध दवा मिलती है तो तुरंत खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को सूचित करें।
(एएनआई)
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