महाराष्ट्र सरकार ने MPSC भर्ती परीक्षा में कथित पे

MPSC पेपर लीक विवाद मामले में महाराष्ट्र सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय समिति, उम्मीदवारों की मांगों पर होगा विचार

पेपर लीक विवाद पर एक्शन में महाराष्ट्र सरकार

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच करने और चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच उम्मीदवारों की शिकायतों पर विचार करने के लिए बॉम्बे उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंधे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है। अन्य सदस्यों में आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी.डी. नाइक शामिल हैं। एमपीएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में पुणे में प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों की मांगों पर चर्चा के बाद महाराष्ट्र के मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने इस निर्णय की घोषणा की।

एमपीएससी उम्मीदवारों का आंदोलन खत्म कराने की पहल

उम्मीदवारों की मांगों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना, अगले तीन वर्षों में 70,000 पदों पर भर्ती करना और जनवरी में होने वाली ग्रुप-सी परीक्षा के लिए रिक्तियों की संख्या बढ़ाना शामिल है। उम्मीदवारों ने एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाने की भी मांग की है। हालांकि, इस मांग पर सरकार का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। आज सुबह महाराष्ट्र सरकार ने भीमनवार को कथित पेपर लीक मामले की जांच पूरी होने तक अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया। यह कदम पुणे में उम्मीदवारों द्वारा उनके इस्तीफे की मांग को लेकर 11 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद उठाया गया। भोसले ने प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों से मुलाकात की और घोषणा की कि आंदोलन के संबंध में छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे। उन्होंने उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि एमपीएससी पेपर लीक मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एमपीएससी उम्मीदवारों के साथ अपनी बैठक के बाद एएनआई से बात करते हुए भोसले ने कहा, एमपीएससी के संबंध में एक सकारात्मक रुख स्थापित किया गया है। समिति को केवल कुछ तकनीकी समायोजन करने की आवश्यकता थी। हमने वे बदलाव तैयार कर लिए हैं और अब उन्हें प्रस्तुत किया जा रहा है।

परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों की जांच जारी

इससे पहले एक्स पर एक पोस्ट में भीमनवार ने लिखा था, राज्य सरकार ने एमपीएससी पेपर लीक मामले में न्यायिक जांच की घोषणा की है। मैंने अपने पूरे जीवन में हमेशा नैतिकता को प्राथमिकता दी है। इसलिए, मैंने इस जांच के पूरा होने तक पद पर बने रहने के बजाय इस अवधि के दौरान अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने आगे कहा, एमपीएससी के छात्रों की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और हित हमेशा से मेरी प्राथमिकता रहे हैं और भविष्य में भी रहेंगे। यह बयान पुणे में एमपीएससी उम्मीदवारों द्वारा कथित परीक्षा अनियमितताओं और आयोग से संबंधित अन्य मुद्दों पर कार्रवाई की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच आया है। एमपीएससी ने 22 मार्च को आयोजित स्क्रीनिंग परीक्षा में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद प्रारंभिक जांच शुरू की थी। आयोग ने 29 जुलाई, 2025 को ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया था। स्क्रीनिंग परीक्षा 22 मार्च को महाराष्ट्र के छह संभागीय मुख्यालयों में ऑफलाइन आयोजित की गई थी और इसका परिणाम 12 जून को घोषित किया गया था।

परीक्षा से पहले प्रश्न मिलने का दावा

स्क्रीनिंग परीक्षा के बाद 506 उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए योग्य पाए गए। इनमें से 488 उम्मीदवारों के साक्षात्कार 1 जुलाई से 22 जुलाई के बीच आयोजित किए गए। साक्षात्कारों के पूरा होने के बाद आयोग ने 488 उम्मीदवारों की एक अनंतिम सामान्य मेरिट सूची प्रकाशित की, जिसमें 485 योग्य और तीन अयोग्य उम्मीदवार शामिल थे। इसी बीच 22 जुलाई से 26 जुलाई के बीच आयोग को उम्मीदवारों और जन प्रतिनिधियों से ईमेल के माध्यम से शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें 22 मार्च की स्क्रीनिंग परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले, 20 मार्च को ही प्रश्न पत्र या प्रश्न प्राप्त हो गए थे और बाद में इन्हें सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया गया था। परीक्षा में अनियमितताओं के बाद एमपीएससी ने इस पद के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी। 

(इनपुट: ANI)

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