महाराष्ट्र में पेराई सत्र के दौरान चीनी उत्पादन 20 प्रतिशत घट सकता है: मिल संघ
छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र में बारिश की कमी के कारण गन्ने की पैदावार घटने और चीनी की चीनी प्राप्ति दर कम रहने से आगामी पेराई सत्र में चीनी उत्पादन करीब 20 प्रतिशत घटकर 80 लाख टन रह सकता है। वेस्ट इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन (डब्ल्यूआईएसएमए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
बारिश की कमी से गन्ने की पैदावार प्रभावित
डब्ल्यूआईएसएमए के चेयरमैन भैरवनाथ थोम्ब्रे ने सोमवार को कहा कि इस साल महाराष्ट्र में बारिश की भारी कमी हुई है, जिसका असर गन्ने सहित कई फसलों की पैदावार पर पड़ा है। थोम्ब्रे ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘इन वजहों से चीनी उत्पादन 20 प्रतिशत घटकर लगभग 80 लाख टन रह जाएगा।’’ महाराष्ट्र चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक रहा है और पिछले सत्र (वर्ष 2025-26) में राज्य में लगभग 99 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
गन्ने की प्रति एकड़ उपज 30-40 प्रतिशत कम
गन्ने की खेती का रकबा तो अच्छा है, लेकिन इस साल गन्ने की पैदावार (प्रति एकड़ उपज) 30-40 प्रतिशत तक कम हो रही है। पेराई में जितनी देरी होगी, पैदावार उतनी ही घटती जाएगी। इसलिए, गन्ने की जल्द पेराई जरूरी है। इसके अलावा, चीनी मिलें चलाने के लिए पानी की कमी है और सूखे जैसे हालात के कारण अगले साल जनवरी-फरवरी में इसे संभालना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने इस साल जलाशयों को पीने के पानी के लिए आरक्षित रखा है।’’
अच्छी कीमतों से नुकसान की भरपाई की उम्मीद
उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतें अभी अच्छी हैं और दिवाली के त्योहार के दौरान भी स्थिर रह सकती हैं। थोम्ब्रे ने कहा, ‘‘चीनी प्राप्ति दर (कुल वजन से निकाली गई चीनी का प्रतिशत) से होने वाले नुकसान की भरपाई अच्छी कीमतों से की जा सकती है। सरकार ने कोटा जारी करने के बजाय सीधे बाजार में चीनी भेजने की अनुमति भी दी है।’’
15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने के फैसले का समर्थन
उन्होंने इस साल 15 अक्टूबर से चीनी पेराई सत्र जल्दी शुरू करने के फैसले का भी समर्थन किया और कहा कि इससे किसानों और चीनी मिलों को फायदा होगा। थोम्ब्रे ने कहा कि मराठवाड़ा, विदर्भ, सोलापुर और अहिल्यानगर जिलों में पिछले 45 दिनों से बारिश न होने के कारण हालात गंभीर हो गए हैं, जिससे गन्ना सूख रहा है। उन्होंने कहा कि अगर गन्ने को जल्द से जल्द पेराई के लिए भेजा जाए, तो किसानों को कुछ लाभ मिल सकता है, वरना फसल खेतों में ही सूख सकती है।
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