मंदसौर में भगवान पशुपतिनाथ को बांधी जाएगी 12 फीट लंबी अनोखी राखी, 19 साल से निभा रहीं परंपरा
मंदसौर (मध्यप्रदेश)। में रक्षाबंधन के पर्व पर भगवान पशुपतिनाथ के प्रति आस्था का अनोखा नजारा देखने को मिलेगा। मंदसौर निवासी अर्पणा जैन इस बार भगवान पशुपतिनाथ के लिए करीब 12 फीट लंबी विशेष राखी तैयार कर रही हैं। इस राखी में महादेव का रौद्र रूप और प्रलय का दृश्य दर्शाया गया है। साथ ही राखी में शिव परिवार, अर्धनारीश्वर, गंगा मुख और लस्सा जैसे धार्मिक स्वरूपों को भी शामिल किया गया है, जो इसे और खास बना रहे हैं।
15 दिन पहले से ही बना रही राखी
अर्पणा जैन ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व से करीब 15 दिन पहले ही परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर राखी तैयार करने की तैयारी शुरू कर दी थी। हर साल भगवान श्री पशुपतिनाथ को अलग-अलग स्वरूप और थीम पर राखी बांधने की परंपरा है। इस बार राखी में महादेव के रौद्र रूप और प्रलय के दृश्य के साथ शिव परिवार, अर्धनारीश्वर, गंगा मुख और भी विशेष रूप से दर्शाया गया है।
बाबा पशुपतिनाथ को अपना भाई मानकर बांधती हैं राखी
खास बात यह है कि अर्पणा जैन का मायका जयपुर में है। रक्षाबंधन के मौके पर वह मायके जयपुर नहीं जातीं, बल्कि मंदसौर में ही बाबा पशुपतिनाथ को अपना भाई मानकर यह पर्व मनाती हैं। राखी तैयार करने के लिए वह जयपुर से विशेष सामग्री भी लेकर आती हैं और परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर कई दिनों की मेहनत से इस अनोखी राखी को तैयार करती हैं। करीब 12 फीट लंबी इस विशेष राखी को तैयार करने में परिवार के सदस्यों ने भी सहयोग किया है।
मंदिर के गर्भगृह के चारों द्वार के लिए विशेष वंदनवार भी तैयार
रक्षाबंधन के विशेष मुहूर्त में अर्पणा जैन अपने परिवार के साथ भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचेंगी और बाबा पशुपतिनाथ को विधि-विधान के साथ राखी बांधेंगी।राखी के साथ मंदिर के गर्भगृह के चारों द्वार के लिए विशेष वंदनवार भी तैयार किए गए हैं। इन्हें मंदिर के चारों द्वार पर लगाया जाएगा।खास बात यह भी है कि अर्पणा जैन पिछले 19 वर्षों से लगातार भगवान पशुपतिनाथ को राखी बांधती आ रही हैं।
19 वर्षों से बांध रही राखी
उनका कहना है कि उनका कोई सगा भाई नहीं है, लेकिन जब से उनका विवाह मंदसौर में हुआ, तभी से उन्होंने शिवना नदी के किनारे विराजित अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ को अपना भाई मानकर राखी बांधना शुरू किया। 19 वर्षों से चली आ रही यह आस्था अब एक परंपरा बन चुकी है। हर साल राखी का स्वरूप अलग होता है।
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