मथुरा के दीनदयाल धाम में स्मृति महोत्सव में ब्रजेश

पंडित दीनदयाल के विचारों को जीवन में करें आत्मसातः ब्रजेश पाठक

Brajesh Pathak at smriti-mahotsav-2026

मथुरा (उत्तर प्रदेश)। जनपद मथुरा के फरह स्थित दीनदयाल धाम में अंत्योदय एवं एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की याद में चार दिवसीय ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति महोत्सव मेला-2026’ का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी शामिल हुए। उपमुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को नमन करते हुए उनके विचारों और सिद्धांतों को वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कहा कि उनके विचारों को हमें अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।

राष्ट्रसेवा और अंत्योदय को जीवन में उतारने पर जोर

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, सनातन संस्कृति, अंत्योदय और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल के सिद्धांतों को केवल पढ़ना या सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने जीवन और आचरण में आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

सनातन संस्कृति और राष्ट्रवाद के प्रति समर्पण

उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने सनातन संस्कृति और राष्ट्रवाद के ध्वज को सदैव ऊंचा रखा। उनका चिंतन भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा था। ‘एकात्म मानव दर्शन’ और ‘अंत्योदय’ के माध्यम से उन्होंने विकास की ऐसी अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता को केंद्र में रखा गया।

<blockquote lang="hi" dir="ltr">आज जनपद मथुरा के फरह स्थित पावन दीनदयाल धाम में प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं अंत्योदय और एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पावन स्मृति में चार दिवसीय ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति महोत्सव मेला-2026’ (7 से 10 अक्टूबर) के अंतर्गत आयोजित &quot;विराट किसान एवं युवा सम्मेलन&quot; को संबोधित करते हुए दीनदयाल धाम की इस पावन धरा से किसानों की समृद्धि, युवाओं के सशक्तीकरण और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास एवं सम्मान पहुंचाने के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जीवन और चिंतन भारत की सनातन संस्कृति, राष्ट्रवाद तथा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा है। उनका ‘अंत्योदय’ का विचार आज भी जनकल्याण, समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में प्रेरणा प्रदान करता है। हमारे अन्नदाता किसान देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास की आधारशिला हैं, वहीं देश का युवा भारत की ऊर्जा, सामर्थ्य और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। किसान की समृद्धि और युवा की प्रतिभा एवं सामर्थ्य को अवसर प्रदान करना ही सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की मजबूत नींव है। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री दिनेश जी, मा० सांसद, राज्यसभा श्री तेजवीर सिंह जी, मा० मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार श्री भूपेंद्र सिंह चौधरी जी, मा० अध्यक्ष, जिला पंचायत, मथुरा श्री किशन चौधरी जी, अध्यक्ष, मेला समिति श्री सोहनलाल जी, मंत्री, मेला समिति श्री मनीष अग्रवाल जी, कोषाध्यक्ष, मेला समिति एवं प्रबंधक, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, मथुरा श्री नरेंद्र पाठक जी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। @BJP4India @BJP4UP #दीनदयाल_धाम #पंडित_दीनदयाल_उपाध्याय</p>&mdash; Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) <a href="https://x.com/brajeshpathakup/status/2108124512919437346?ref_src=twsrc%5Etfw">October 8, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

भारत तक सीमित नहीं है दीनदयाल का चिंतन

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन केवल भारत तक सीमित नहीं है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से प्रेरित उनका दर्शन मानवता के कल्याण और समरस समाज की स्थापना का संदेश देता है। आज दुनिया भारत की सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों की ओर आशा की दृष्टि से देख रही है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारत माता की कीर्ति और भारतीय विचारधारा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने का कार्य किया।

किसान और युवा देश के महत्वपूर्ण आधार

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि किसान और युवा भारत की विकास यात्रा के दो महत्वपूर्ण आधार हैं। हमारे अन्नदाता किसान देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास की आधारशिला हैं, वहीं देश का युवा अपनी प्रतिभा, ऊर्जा और नवाचार के माध्यम से भारत के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर रहा है। किसानों की समृद्धि और युवाओं को अवसर प्रदान करना विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। अंत्योदय, आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र प्रथम की उनकी भावना को आत्मसात करते हुए हम विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं।

सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना का केंद्र

उन्होंने कहा कि दीनदयाल धाम में आयोजित यह मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पूरे वर्ष इस मेले का इंतजार करते हैं। मेले का लगातार विस्तार और इसमें बढ़ती जनभागीदारी यह दर्शाती है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और उनकी स्मृतियों से आमजन का गहरा जुड़ाव है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि दीनदयाल धाम की यह पावन भूमि हमें सेवा, समर्पण, अंत्योदय और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ और सम्मान पहुंचे तथा किसान और युवा देश की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

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