मऊगंज में पत्रकार सुखवंत मिश्रा पर दर्ज केस के विर

पत्रकार पर FIR के विरोध में मऊगंज में पत्रकारों का धरना, पुलिस कार्रवाई के खिलाफ जताया आक्रोश

Journalists protest in Mauganj

रीवा (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के नवागत जिले मऊगंज में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर मीडिया जगत में भारी आक्रोश व्याप्त है। भारतीय सेना में देश सेवा करने के बाद बीते 6 वर्षों से निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे पूर्व सैनिक एवं पत्रकार सुखवंत मिश्रा के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमे को लेकर जिलेभर के पत्रकारों ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार सुबह 11 बजे से ही आक्रोशित पत्रकार मऊगंज स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मऊगंज पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर पत्रकार सुखवंत मिश्रा के खिलाफ दुष्कर्म जैसी गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पत्रकारों का स्पष्ट आरोप है कि पुलिस ने किसी भी तरह की प्राथमिक जांच किए बिना केवल रंजिश और पूर्वाग्रह के तहत वर्ष 2024 के एक पुराने आवेदन को आधार बनाकर यह फर्जी मुकदमा कायम किया है।

नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई का आरोप

गृह मंत्रालय एवं सर्वोच्च न्यायालय की स्पष्ट गाइडलाइन्स हैं कि किसी भी पत्रकार या पूर्व सैनिक के खिलाफ शिकायत मिलने पर बिना उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच के सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। लेकिन आरोप है कि मऊगंज थाना प्रभारी ने सभी नियमों और प्रशासनिक निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए यह एकतरफा कार्रवाई की है।

चौथे स्तंभ की आवाज दबाने की साजिश

पत्रकार सुखवंत मिश्रा सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में समाज को आईना दिखाने का काम कर रहे थे। स्थानीय पत्रकारों और मउगंज प्रेस क्लब का मानना है कि उनकी बेबाक पत्रकारिता से बौखलाए कुछ स्थानीय राजनीतिक तत्वों और पुलिस अधिकारियों के गठजोड़ ने साजिश के तहत उन्हें झूठे केस में फंसाने का षड्यंत्र रचा है।

रविवार को भाजपा कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे पत्रकारों ने साफ संदेश दिया है कि सत्ता और पुलिस का गठजोड़ यदि निष्पक्ष कलम को दबाने की कोशिश करेगा, तो पत्रकार चुप नहीं बैठेंगे।

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