ब्राह्मण समुदाय को लुभाने की कोशिश कर रही सपा, मायावती का तीखा हमला
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। मायावती ने सपा पर चुनावी लाभ के लिए अपना राजनीतिक रुख बदलने का आरोप लगाया। यह हमला तब हुआ जब SP प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी के PDA फॉर्मूले की नई व्याख्या की।
ब्राह्मण समुदाय को लुभाने की कोशिश कर रही सपा: मायावती
मायावती ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी उच्च जाति के मतदाताओं, विशेषकर ब्राह्मणों को BSP की ओर जाते देख ब्राह्मण समुदाय को लुभाने की कोशिश कर रही है। उनकी यह टिप्पणी अखिलेश यादव के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में लखनऊ में एक ब्राह्मण सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि पार्टी के PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्याक) फॉर्मूले में 'P' का अर्थ 'पंडित' भी है। उन्होंने भाजपा सरकार पर ब्राह्मणों को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया।
अंबेडकरवादी पार्टी है 'बसपा'
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, "जैसा कि आप सब जानते हैं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अंबेडकरवादी पार्टी है जो समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित है और 'सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय' की नीति और सिद्धांत का पालन करती है। उत्तर प्रदेश में इसने जो चार सरकारें बनाईं, वे भी इसी आधार पर चलाई गईं, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) गिरगिट की तरह खुलेआम और स्पष्ट रूप से अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी हितों के लिए रंग बदलती रहती है।
<blockquote lang="hi" dir="ltr">1.जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त पर अमल करने वाली सर्वसमाज-हितैषी अम्बेडकरवादी पार्टी है और यूपी में चार बार रही सरकार भी इसी के आधार पर चलायी है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति व…</p>— Mayawati (@Mayawati) <a href="https://x.com/Mayawati/status/2085932713689886742?ref_src=twsrc%5Etfw">August 8, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
सपा ने क्यों बदला 'पी' का अर्थ
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि उच्च जाति समुदायों में बसपा के बढ़ते समर्थन को देखते हुए सपा ने पीडीए में 'पी' का अर्थ 'पिछड़े' से बदलकर 'पंडित' कर दिया है। पोस्ट में लिखा था, इसी क्रम में पहले अपने तथाकथित 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) में 'पी' को 'पिछड़े' के रूप में प्रचारित करने के बाद अब उच्च जाति समाज, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय को तेजी से बसपा में शामिल होते और इसी आधार पर पार्टी उम्मीदवारों को नामांकित होते देख, सपा असहज महसूस कर रही है। उसने 'पी' को 'पंडित' में बदल दिया है, जो उनके राजनीतिक धोखे और छल का एक और जीता-जागता सबूत है। अगर नहीं तो और क्या है?
सपा की 'संकीर्ण जातिवादी राजनीति' के प्रति सतर्क रहने का किया आग्रह
मायावती ने सभी समुदायों के मतदाताओं से सपा की 'संकीर्ण जातिवादी राजनीति' के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया है। यह तर्क देते हुए कि इस तरह की राजनीतिक चालें अल्पकालिक चुनावी लाभ तो दे सकती हैं, लेकिन समाज के समग्र कल्याण की गारंटी नहीं दे सकतीं। इस तरह की छल और कपट की राजनीति से किसी व्यक्ति को थोड़े समय के लिए लाभ तो मिल सकता है, लेकिन इससे पूरे समाज का कल्याण कभी नहीं हो सकता। इसलिए, समाज के सभी वर्गों के लोगों को समाजवादी पार्टी (एसपी) की इस कपटपूर्ण राजनीति और इसकी संकीर्ण जातिवादी राजनीति के प्रति सतर्क रहना चाहिए। यह समय की मांग है और समाज के सभी वर्गों के हित में भी है।
(इनपुट: ANI)
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