मायावती का बड़ा दांव: दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले से सत्ता में करेंगी वापसी!
नई दिल्ली: आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) एक बार फिर 'ब्राह्मण कार्ड' का उपयोग कर रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के पुराने सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को दोहराना है। यूपी विधानसभा चुनाव में सत्ता हासिल करने की कोशिश में जुटी बीएसपी अब खुलकर ब्राह्मण कार्ड खेलती नजर आ रही है।
ब्राह्मणों को अपनी सरकार में दी गई हिस्सेदारी की याद दिलाई
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने अपनी सरकार में ब्राह्मणों को दी गई हिस्सेदारी की भी याद दिलाई। आज उन्होंने सोशल मीडिया 'एक्स' पर पोस्ट कर बताया है कि पार्टी उच्च जाति, खासकर ब्राह्मण समाज को उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है। मायावती ने कार्यकर्ताओं को यह संदेश ऐसे समय दिया है, जब यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है।
2007 के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण का दिया हवाला
मायावती ने अपने पोस्ट में 2007 के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण का हवाला देते हुए दावा किया है कि ब्राह्मण समाज के योगदान से पार्टी पूर्ण बहुमत की सरकार बना सकती हैं। उन्होंने कहा है कि ब्राह्मण समाज का हित बीएसपी में है। 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत, नीयत और नीति पर अमल करके पार्टी ने हर स्तर पर भागीदारी को साबित किया है। जबकि, दूसरी पार्टियों की सरकार ने उन्हें उपेक्षित किया है।
भागीदारी के हिसाब से उम्मीदवार बनाने का आश्वासन
साथ ही, मायावती ने कहा है कि उच्च वर्ग में से क्षत्रिय, वैश्य और अन्य समाज के लोगों को भी पार्टी मौका देगी। जिसकी जितनी तैयारी होगी उसकी उतनी भागीदारी होगी और चुनाव में उम्मीदवार भी बनाया जायेगा।
बीएसपी की नीतियां और कार्यक्रम जनहित के साथ कानून व्यवस्था में अव्वल- मायावती
उन्होंने कहा है कि राजनीति में कई बार कुछ पार्टियां सिर्फ 'लॉलीपाप' थमा कर विश्वास जीतने की कोशिश करती हैं। लेकिन, बीएसपी ऐसा नहीं करती। बीएसपी संकीर्ण स्वार्थ की राजनीति से ऊपर उठकर पूरे समाज के हित और कल्याण को अपना संवैधानिक कर्तव्य समझती है। यही वजह है कि बीएसपी की नीतियां और कार्यक्रम न केवल जनहित में होते हैं, बल्कि अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था के मामले में भी देश के लिए बेहतरीन साबित होते हैं।
बीएसपी 'बहुजन समाज' और उपेक्षित वर्गों की आवाज
बीएसपी देश के 'बहुजन समाज' और उन गरीब, शोषित, उपेक्षित वर्गों की आवाज़ है, जो अपने संवैधानिक अधिकारों और न्याय के लिए बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर के दिखाए मार्ग पर चलती है। यह पार्टी बड़े पूंजीपतियों या धन्नासेठों के इशारों पर नहीं चलती, बल्कि अपने लोगों के तन-मन-धन से मजबूत होती है। इसलिए कुछ संकीर्ण, जातिवादी, सांप्रदायिक और पूंजीवादी ताकतें बीएसपी को कभी स्वीकार नहीं कर पातीं। चुनावों के करीब आते ही वे तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर पार्टी और उसके नेतृत्व को बदनाम करने की कोशिश करते रहते हैं।
मीडिया पर साधा निशाना
मीडिया के एक वर्ग द्वारा भी बीएसपी के उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाए जाते हैं, ताकि लोगों का ध्यान दूसरी पार्टियों की चुनावी साजिशों से भटकाया जा सके। जबकि, सच यह है कि बीएसपी को जो भी आर्थिक सहयोग मिलता है, वह पूरी तरह क़ानूनी और स्पष्ट होता है, जिसका खर्च उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने में किया जाता है। ऐसे अफवाहें फैलाना न केवल गलत है, बल्कि पार्टी और देश के हित में भी नहीं है।
पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का बढ़ाया उत्साह
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि केवल यूपी स्टेट यूनिट के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ पाल ही नहीं, बल्कि पार्टी के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता पार्टी संगठन को मजबूत बनाने, जनाधार बढ़ाने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पूरी मेहनत लगा रहे हैं। वे उम्मीदवारों की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक स्थिति के साथ-साथ उनकी पार्टी के प्रति वफादारी और टिकाऊपन का भी गहराई से मूल्यांकन कर रहे हैं।