उत्तर प्रदेश में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल के बीच,

Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर दान विवाद पर मायावती का बड़ा बयान, राजनीतिकरण न करने की दी सलाह

Mayawati Demands Strict Action Over Ram Mandir Financial Irregularities

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने मंगलवार को राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं को अत्यंत गंभीर और चिंताजनक बताया। उन्होंने राजनीतिक दलों से इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने का आग्रह किया।

दोषियों पर कार्रवाई, राजनीति से दूरी की अपील

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने एक पोस्ट में कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने इस मामले का राजनीतिक लाभ उठाने के खिलाफ चेतावनी दी। BSP प्रमुख ने आगे सुझाव दिया कि चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राम मंदिर में देश के अन्य प्रमुख मंदिरों द्वारा अपनाई जाने वाली वित्तीय लेखा प्रणाली को लागू किया जाना चाहिए।

लागू हो देश के अन्य बड़े मंदिरों जैसी व्यवस्था'

मायावती ने कहा, "अयोध्या के श्री राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी, गबन और दुरुपयोग के संबंध में मीडिया में प्रतिदिन आ रही विभिन्न प्रकार की खबरें बेहद गंभीर और चिंताजनक हैं। ऐसे लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। हालांकि, इस मामले का राजनीतिकरण करना भी उचित नहीं है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि भविष्य में मंदिर में चढ़ावे से संबंधित कोई शिकायत न उठे, देश भर के अन्य प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाली वित्तीय लेखा प्रणाली को अपनाकर और लागू कर इस मामले का जल्द समाधान करना उचित होगा।"

धर्म और राजनीति को अलग रखने की सलाह

बसपा प्रमुख ने संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए राजनीति, अपराध और धर्म को पूरी तरह से अलग रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "यह उचित और संवैधानिक होगा कि देश में राजनीति का अपराधीकरण न हो, अपराध का राजनीतिकरण न हो, धर्म का राजनीतिकरण न हो और राजनीति का अंधाधुंध सांप्रदायिकरण न हो। यह राष्ट्र और जनता के हित में राजनीतिक दलों को बसपा की सलाह है, साथ ही देश की जनता से हमारी अपील भी है।"

दान विवाद पर तेज हुई सियासी बयानबाजी

गौरतलब है कि दान राशि के कथित गबन से जुड़े हालिया विवाद ने राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को निशाना बनाया है, वहीं सत्ताधारी भाजपा ने पलटवार करते हुए विपक्ष के राम मंदिर निर्माण के विरोध में लिए गए रुख को याद दिलाया है और उन पर विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया है।

आरोपी न्यायिक हिरासत में, एसआईटी जांच जारी

सोमवार को अयोध्या की एक स्थानीय अदालत ने दान घोटाले के सभी आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत का यह फैसला श्री राम जन्मभूमि मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं और धन एवं चढ़ावे के दुरुपयोग की रिपोर्टों की उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की गई गहन जांच के बाद आया है। इस मामले ने उत्तर प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक टकराव छेड़ दिया है, जिसमें सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दल मंदिर के वित्त प्रबंधन को लेकर एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं, जबकि विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच जारी है। (Source: ANI)

यह भी पढ़ें: सीएम योगी आदित्यनाथ ने रामपुर को दी ₹690 करोड़ की सौगात, सपा-कांग्रेस पर साधा निशाना