महबूबा मुफ्ती ने फारूक अब्दुल्ला पर साधा निशाना, कश्मीरी पंडितों की वापसी का किया स्वागत
जम्मू। पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने जम्मू के पीर पंजाल और चिनाब घाटी क्षेत्रों के लिए 'संभागीय दर्जा' देने संबंधी अपने बयान से उपजे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने 'डिक्सन प्लान' से अपनी पार्टी की दूरी स्पष्ट की। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनके पिता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला को "डिक्सन प्लान के कारण ही गिरफ्तार किया गया था, इसलिए यह नेशनल कॉन्फ्रेंस का एजेंडा है, पीडीपी का नहीं।"
अपने बयान पर दी सफाई
पीर पंजाल और चिनाब घाटी को संभाग का दर्जा देने के अपने बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, "मैं प्रशासनिक व्यवस्था की बात कर रही थी, मैंने डिक्सन प्लान के बारे में कुछ भी नहीं कहा।" अपने बयान के समर्थन में अपने पिता की विचारधारा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मुफ्ती साहब ने अपना पूरा जीवन जम्मू-कश्मीर को एकजुट रखने के प्रयास में बिताया।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि पीडीपी जम्मू-कश्मीर का विभाजन नहीं चाहती है। वह इन जिलों के लिए केवल संभागीय प्रशासन की मांग कर रही थीं क्योंकि ये क्षेत्र काफी दूर स्थित हैं, जिससे स्थानीय लोगों को अपनी समस्याओं के लिए अधिकारियों तक पहुँचने में कठिनाई होती है।
क्या है डिक्सन प्लान?
डिक्सन प्लान 1950 में संयुक्त राष्ट्र के मध्यस्थ सर ओवेन डिक्सन द्वारा दिया गया एक प्रस्ताव था। इसमें जम्मू-कश्मीर के विभाजन का सुझाव दिया गया था, जिसके तहत लद्दाख को भारत को, उत्तरी क्षेत्रों/पीओके को पाकिस्तान को सौंपने और कश्मीर घाटी में संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी। भारत ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
कश्मीरी पंडितों की वापसी का स्वागत
कश्मीरी पंडितों की वापसी का स्वागत महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की वापसी का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि वे वापस आएं।" उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने पहले भी राज्य के विधानसभा में कश्मीरी पंडितों के लिए दो सीटें आरक्षित करने की मांग की थी।
कश्मीरी पंडितों के पलायन से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने जवाब दिया कि, "उन्हें वापस आना चाहिए, हम चाहते हैं कि वे लौटें।" उन्होंने आगे कहा कि चुनावों में उनके लिए दो आरक्षित सीटें होने से उनके और कश्मीरी मुसलमानों के बीच बातचीत बढ़ेगी, जिससे उनके आपसी संबंधों में सुधार होगा।
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