मोहन भागवत ने संत ज्ञानेश्वर महाराज की 750वीं जयंती पर 'ज्ञानरंग ज्ञानेश्वरी' ऐप का किया अनावरण
मुंबई (महाराष्ट्र)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भगवत ने संत ज्ञानेश्वर महाराज की 750वीं जयंती के अवसर पर मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया, जहां 'ज्ञानरंग ज्ञानेश्वरी' मोबाइल एप्लिकेशन का अनावरण किया गया। सभा को संबोधित करते हुए भगवत ने भगवद गीता और ज्ञानेश्वरी को भारतीय ज्ञान परंपरा के आधारभूत स्तंभ बताया और समकालीन जीवन में उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
आध्यात्मिक ज्ञान का दिनचर्या के माध्यम से करें अभ्यास
उन्होंने कहा कि यद्यपि परिस्थितियाँ और समाज का स्वरूप समय के साथ बदलता रहता है, जीवन, सत्य और मानवीय आचरण से संबंधित मूलभूत सिद्धांत शाश्वत बने रहते हैं। भागवत के अनुसार, महान विचारकों और आध्यात्मिक नेताओं ने इन चिरस्थायी सिद्धांतों को अपने-अपने युग की परिस्थितियों के अनुरूप समाज के समक्ष प्रस्तुत किया है। भागवत ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने कठिन समय में महाराष्ट्र के समाज को एक मजबूत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आधार प्रदान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आध्यात्मिक ज्ञान को जीवन के उत्तरार्ध तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक आचरण और दिनचर्या के माध्यम से अभ्यास में लाना चाहिए।
ज्ञानेश्वरी को केवल पढ़ने योग्य ग्रंथ न मानने का आग्रह
आरएसएस प्रमुख ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी की तीव्र प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान चेतना और ब्रह्मांड के मूल स्वरूप जैसे विषयों का गहन अध्ययन कर रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित अवधारणाओं को समझने और उन्हें समकालीन परिस्थितियों से जोड़ने के महत्व पर बल दिया। भागवत ने लोगों से ज्ञानेश्वरी को केवल पढ़ने योग्य ग्रंथ न मानने का आग्रह करते हुए इसके उपदेशों को आत्मसात करने और दैनिक जीवन में उतारने का आह्वान किया।
सच्चे ज्ञान का महत्वपूर्ण परिणाम सकारात्मक आदतें अपनाना
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कुछ नकारात्मक आदतों को त्यागकर सकारात्मक आदतें अपना लेता है, तो यही सच्चे ज्ञान का एक महत्वपूर्ण परिणाम है। उन्होंने आगे कहा कि भारत की पहचान केवल भाषा, क्षेत्र, जाति या पूजा पद्धतियों से नहीं, बल्कि उसके गहन ज्ञान भंडार और आध्यात्मिक विरासत से परिभाषित होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत ने विश्व से बहुत कुछ ग्रहण किया है और भविष्य में भी करता रहेगा, लेकिन इस प्रगति और ज्ञान का उपयोग मानव कल्याण और समाज के उत्थान के लिए किया जाना चाहिए।
ज्ञानेश्वरी के उपदेशों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का लक्ष्य
आरएसएस प्रमुख ने ज्ञानेश्वरी के उपदेशों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व पर भी बल दिया ताकि भावी पीढ़ियां भारतीय ज्ञान परंपरा को समझ सकें और बदलते चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि ऐसे ज्ञान का संरक्षण और प्रसार यह सुनिश्चित करने में सहायक होगा कि इसके मूल मूल्य भावी पीढ़ियों के लिए प्रासंगिक बने रहें। भागवत ने ज्ञानेश्वरी से जुड़ी अंतिम प्रार्थना 'पसायदान' का आह्वान करते हुए सभी के सुख और कल्याण के लिए प्रार्थना की।
(इनपुट: ANI)
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