MP News : मध्य प्रदेश में एक राजनीतिक विवाद उभर कर

मोहन सरकार कर रही शिवराज की नीति पर पुनर्विचार; महिलाओं व बच्चों के पोषण पर खतरा

मोहन सरकार कर रही शिवराज की नीति पर पुनर्विचार; महिलाओं व बच्चों के पोषण पर खतरा

MP News : मध्य प्रदेश में एक राजनीतिक विवाद उभर कर सामने आय़ा है। प्रदेश सरकार कथित रूप से टेक होम राशन (THR) योजना पर पुनर्विचार कर रही है। यह योजना पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में विकसित एक प्रमुख पोषण कार्यक्रम थी। लेकिन भाजपा के दो बड़े नेताओं के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं, तो असली सवाल यह है कि इसकी कीमत कौन चुकाएगा?

क्या है टेक होम राशन योजना?

टेक होम राशन (THR) एक सरकारी पोषण कार्यक्रम है, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 6 महीने से 3 साल तक के बच्चों के घर तक तैयार या कच्चे पोषक आहार के पैकेट पहुंचाए जाते हैं। इस योजना का उद्देश्य यह था कि लाभार्थियों को राशन लेने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों तक जाने की आवश्यकता न पड़े।

कल्याणकारी योजना में एक

शिवराज सिंह चौहान के शासन में यह योजना राज्य के दूरस्थ जिलों में सबसे दिखाई देने वाली कल्याणकारी योजनाओं में से एक बन गई। अब मोहन यादव सरकार पूरे नीति ढांचे की समीक्षा की बात कर रही है, जिससे राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।

मोहन बनाम शिवराज से भाजपा के भीतर टकराव

यह सिर्फ प्रशासनिक दक्षता का मामला नहीं है। यह भाजपा के दो प्रभावशाली नेताओं के बीच गहरे तनाव को भी दर्शाता है। एक ओर हैं शिवराज सिंह चौहान, जो अब केंद्रीय कृषि मंत्री हैं लेकिन मध्य प्रदेश की राजनीति में अभी भी प्रभावशाली हैं। दूसरी ओर हैं मोहन यादव, जो दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बने और अब शिवराज की छाया से बाहर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

नेताओं के बीच का तनाव शासन को प्रभावित कर रहा

कांग्रेस नेता Umang Singhar ने आरोप लगाया है कि दोनों नेताओं के बीच का तनाव शासन को प्रभावित कर रहा है। जब एक ही पार्टी के नेता ऊपर राजनीतिक मतभेद सुलझाने में लगे हों, तो नीचे राशन की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

THR योजना के लाभार्थी समाज के सबसे कमजोर वर्गों में आते हैं। योजना में कोई भी व्यवधान सीधे इन लोगों को प्रभावित करता है, जिसमें 6 से 36 महीने के बच्चे, जिन्हें पोषक आहार के पैकेट मिलते हैं। गर्भवती महिलाएं हैं, जिनके लिए यह राशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्तनपान कराने वाली माताएं हैं, जिन्हें अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है। गंभीर कुपोषित बच्चे भी शामिल हैं. जिनकी पहचान आंगनवाड़ी केंद्रों पर की जाती है। 

कुपोषण और बौनापन की दर अधिक

मध्य प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण और बौनापन (stunting) की दर अभी भी बहुत अधिक है। ऐसे में राशन वितरण में थोड़ी भी रुकावट बच्चों के विकास पर लंबे समय तक असर डाल सकती है।

भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे

टेक होम राशन योजना पर पहले भी सवाल उठे हैं। राज्य के महालेखा परीक्षक (Accountant General) की ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में पाया गया कि जिन वाहनों को ट्रक बताया गया था, वे वास्तव में मोटरसाइकिल या सामान्य कार थे। यानी कई मामलों में कागजों पर राशन पहुंचा हुआ दिखाया गया, जबकि वास्तव में वितरण नहीं हुआ।

कांगेस ने शिवराज को घेरा

कांग्रेस ने अपने समय में इन निष्कर्षों के आधार पर शिवराज सिंह चौहान को घेरा था। अब जब मोहन सरकार इसे “पुनर्विचार” बता रही है, तो सवाल उठता है कि यह वास्तविक सुधार है या राजनीतिक दूरी बनाने का प्रयास?

केंद्र की POSHAN 2.0 योजना का दबाव

केंद्र सरकार की POSHAN 2.0 पहल और 2026–27 के केंद्रीय बजट में सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण कार्यक्रमों के लिए लगभग 23,100 करोड़ रुपये का प्रावधान यह संकेत देता है कि राज्यों को THR जैसी योजनाओं को मजबूत करना चाहिए, कमजोर नहीं। NITI Aayog और World Food Programme ने भी मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में THR प्रणाली में सुधार की सिफारिश की है। यदि भोपाल में राजनीतिक खींचतान जारी रहती है और बच्चों का पोषण प्रभावित होता है, तो 2030 तक कुपोषण खत्म करने का लक्ष्य—जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का हिस्सा है, दूर ही रह जाएगा।

कल्याणकारी योजनाएं एक सरकार की नहीं होतीं

यदि योजना में कमियां हैं तो उन्हें ठीक किया जाना चाहिए। डिजिटल ट्रैकिंग लागू की जा सकती है। POSHAN Tracker से निगरानी की जा सकती है। ठेकेदारों को जवाबदेह बनाया जा सकता है। स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन में शामिल किया जा सकता है। लेकिन जब तक बेहतर व्यवस्था तैयार न हो जाए, तब तक मौजूदा व्यवस्था को खत्म करना समाधान नहीं है। एक भूखा बच्चा राजनीतिक स्पष्टता का इंतजार नहीं कर सकता। एक गरीब मां की पोषण संबंधी जरूरतें चुनावी चक्र के साथ नहीं रुकतीं। कल्याणकारी योजनाएं किसी मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होतीं, वे समाज के साथ सरकार का एक वादा होती हैं।

मोहन सरकार के पास एक मौका

मोहन यादव सरकार के पास मौका है कि वह इस व्यवस्था को सही तरीके से सुधार करे और पारदर्शिता के साथ लागू करे, लेकिन अगर यह फैसला सिर्फ शिवराज से दूरी बनाने के लिए लिया जाता है तो इतिहास यह दर्ज करेगा कि मध्य प्रदेश के सबसे कमजोर बच्चों के लिए तय राशन उनसे छीन लिया गया।

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