मुरैना में विकास के दावों पर सवाल: कीचड़ भरे रास्ते से निकली शवयात्रा, ग्रामीणों में आक्रोश
मुरैना,(मध्यप्रदेश)। सरकार भले ही गांव-गांव विकास के दावे कर रही हो, लेकिन मुरैना जिले की तहसील पोरसा अंतर्गत ग्राम पंचायत बुधारा से सामने आया यह वीडियो उन दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रहा है।
रास्ता पूरी तरह दलदल और कीचड़ में तब्दील
बारिश के बाद गांव का रास्ता पूरी तरह दलदल और कीचड़ में तब्दील हो गया। ऐसे हालात में ग्रामीणों को एक शवयात्रा तक कीचड़ और पानी के बीच से निकालनी पड़ी। शव को कंधों पर उठाए लोग फिसलते हुए आगे बढ़ते रहे, लेकिन गांव में ऐसा कोई पक्का मार्ग नहीं मिला जिससे अंतिम यात्रा सम्मानपूर्वक निकल सके।
कोई स्थायी समाधान नहीं
यह दृश्य केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उन विकास कार्यों पर बड़ा सवाल है जिनका दावा वर्षों से किया जाता रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सड़क निर्माण और जल निकासी की मांग की गई, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।
विकास के दावों की असल तस्वीर
आज 10 जुलाई किसी के अंतिम यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे विकास के दावों की असल तस्वीर बता रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है, कि यदि समय रहते सड़क और नाली का निर्माण कराया जाता तो अंतिम यात्रा को इस तरह की बदहाली का सामना नहीं करना पड़ता।
विकास के दावे केवल कागजों तक
अब सवाल यह है, कि आखिर कब तक गांवों के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहेंगे? क्या जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस वीडियो से सबक लेकर बुधारा गांव की समस्या का स्थायी समाधान करेंगे, या फिर विकास के दावे केवल कागजों तक ही सीमित रहेंगे?
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