मोतिहारी जिले के छतौनी थाना क्षेत्र निवासी बसंती द

मोतिहारी में महिला ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग

Motihari Woman Alleges Police Inaction

मोतिहारी (बिहार)। मोतिहारी जिले के छतौनी थाना क्षेत्र निवासी बसंती देवी ने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी एवं पुलिस स्वर्ण प्रभात अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने मीडिया को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया है कि पुलिस की लापरवाही और कथित मिलीभगत के कारण उनके परिवार की जान को खतरा उत्पन्न हो गया है।

आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होने का दावा

आवेदन में बसंती देवी ने दावा किया है कि उनके विरोधी रामकिशोर साह, मंजूलाल साह एवं रामजस कुमार के विरुद्ध दर्ज मामलों में पुलिस अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रही है। उनका कहना है कि एक मामले में इंस्पेक्टर स्तर की जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई और जांच के नाम पर कार्रवाई टाल दी गई।

गंभीर केस में भी गिरफ्तारी नहीं होने पर सवाल

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छतौनी थाना कांड संख्या 525/23 में गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है तथा आरोपपत्र में धारा 307 भी जोड़ी गई है। इसके बावजूद पुलिस ने समय पर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। पीड़िता का आरोप है कि इसी कारण आरोपी लगातार समझौते का दबाव बना रहे हैं और धमकियां दे रहे हैं।

हिरासत से छोड़ने और धमकी मिलने का आरोप

बसंती देवी ने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि 2 जुलाई 2026 को पुलिस ने गैर-जमानती मामले में आरोपियों को हिरासत में लिया था, लेकिन उसी रात कथित रूप से बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए उन्हें थाने से छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि रिहाई के बाद आरोपी उन्हें और उनके परिवार को केस वापस लेने तथा जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके पक्ष के एक निर्दोष व्यक्ति को एक अन्य मामले में जेल भेज दिया गया।

उच्च स्तरीय जांच और सुरक्षा की मांग

पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, कथित रूप से लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने तथा स्वयं एवं अपने परिवार को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो परिवार आत्मदाह करने को मजबूर होगा।

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