मप्र हाईकोर्ट ने पलटा अपना ही फैसला, मध्य प्रदेश बॉर्डर पर अभी नहीं खुलेंगे चेक पोस्ट
जबलपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने ही एक पुराने निर्णय को उलटते हुए सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मध्य प्रदेश की सीमाओं (बॉर्डर) पर बंद किए जा चुके परिवहन चेक पोस्ट को दोबारा अभी नहीं खोला जाएगा। सरकार का तर्क है कि अब इन चेक पोस्ट को फिर से शुरू करने का कोई ठोस औचित्य (कारण) नहीं बचा है।
नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला
सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि देश में जीएसटी (GST) लागू होने के बाद व्यापार और परिवहन को सुगम बनाने के लिए नीति आयोग ने एक नया प्रवर्तन ढांचा तैयार किया था। नीति आयोग की 'फास्ट ट्रैकिंग फ्रेट इन इंडिया' रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि माल परिवहन (ट्रकों की आवाजाही) को तेज, लागत प्रभावी (किफायती) और पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया जाए ताकि सीमाओं पर ट्रकों की लंबी कतारें न लगें।
सड़क परिवहन मंत्रालय का दिशा-निर्देश, 2021 का पत्र
केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 6 सितंबर 2021 को ही सभी राज्यों को एक पत्र जारी किया था। इस पत्र में स्पष्ट दिशा-निर्देश थे कि जीएसटी लागू हो जाने के बाद राज्यों की सीमाओं पर नियमित रूप से मैन्युअल परिवहन चेक पोस्ट बनाए रखने की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है। इसी आदेश का पालन करते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने 30 जून 2024 को राज्य के सभी बॉर्डर चेक पोस्ट बंद कर दिए थे।
अब ऐसे होती है वाहनों की जांच
अदालत में सरकार ने साफ किया कि चेक पोस्ट बंद होने से नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा है, क्योंकि अब पारंपरिक रूप से गाड़ी रोककर कागजात जांचने की बजाय हाई-टेक सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। वाहनों की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। नियमों को तोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ सीधे ई-चालान (Online Challan) जारी किए जा रहे हैं। इससे सीमाओं पर भ्रष्टाचार और अनावश्यक जाम से मुक्ति मिली है और माल की आवाजाही पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गई है।
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