यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के लिए बनी हाई-लेवल समित

मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज, 18 जुलाई को कैबिनेट से मंजूरी के बाद विधानसभा में पेश होगा बिल

Cabinet minister Chetanya Kumar Kashyap

भोपाल (मध्य प्रदेश)। यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के लिए बनी हाई-लेवल समिति ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को अपनी फ़ाइनल रिपोर्ट सौंपी। इसके एक दिन बाद, मंगलवार को मध्य प्रदेश सरकार ने घोषणा की कि UCC का ड्राफ़्ट मंज़ूरी के लिए अगली कैबिनेट बैठक में पेश किया जाएगा। कैबिनेट मंत्री चेतन्य कुमार कश्यप ने राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए यह घोषणा की। समिति ने अनुसूचित जनजातियों (ST) को प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है।

18 जुलाई को होगी विशेष बैठक

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि 18 जुलाई को भोपाल के जगदीशपुर में होने वाली कैबिनेट की विशेष बैठक में मंजूरी मिलने के बाद, UCC बिल का ड्राफ़्ट अगले हफ़्ते शुरू होने वाले मॉनसून सत्र के दौरान राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा। राज्य विधानसभा का पांच दिवसीय मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा। कश्यप ने कहा, "मुख्यमंत्री ने कैबिनेट को बताया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए बनी समिति ने उन्हें अपनी पूरी रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट राज्य भर के उन स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) से परामर्श के बाद तैयार की गई है जिनके हितों पर असर पड़ सकता है और अन्य राज्यों में बने कानूनों और उन्हें लागू करने के अनुभवों का अध्ययन करने के बाद तैयार की गई है।

समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपी अंतिम रिपोर्ट

मुख्यमंत्री विधानसभा में बिल पेश करने और मध्य प्रदेश में इसे जल्द से जल्द लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 18 जुलाई को जगदीशपुर में कैबिनेट की एक विशेष बैठक होगी, जिसमें मंत्रियों की परिषद UCC ड्राफ़्ट को मंज़ूरी देगी। इसके बाद, इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। मॉनसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई तक चलेगा।" एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) तैयार करने के लिएगठित उच्चस्तरीय समिति ने तय समय-सीमा के भीतर अपना काम पूरा करने के बाद सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव को अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी।

404 धाराएं और सिफारिशों का पूरा ब्योरा

मुख्यमंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट तीन वॉल्यूम में तैयार की गई है। पहले वॉल्यूम में समिति की सिफारिशें हैं। अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य के कानूनों और मौजूदा प्रथाओं के विश्लेषण के आधार पर, समिति ने 10 अध्यायों में अपनी सिफारिशें पेश की हैं। दूसरे वॉल्यूम में समिति द्वारा प्रस्तावित बिल का ड्राफ़्ट है। प्रस्तावित कानून का ड्राफ़्ट मध्य प्रदेश में वर्तमान में लागू कानूनों और नियमों के अनुसार तैयार किया गया है। प्रस्तावित बिल में 404 धाराएँ और सात अनुसूचियाँ हैं।

9.58 लाख से अधिक लोगों के सुझावों का विश्लेषण

तीसरे वॉल्यूम में जन परामर्श रिपोर्ट है, जिसमें समिति द्वारा जिला और राज्य स्तर पर और अपनी समर्पित वेबसाइट के माध्यम से किए गए व्यापक बातचीत का विवरण दिया गया है। समिति को 9.58 लाख से ज्यादा लोगों की प्रतिक्रिएं मिलीं, और इस वॉल्यूम में प्रश्नावली, लिंग और समुदाय के आधार पर मिली प्रतिक्रियाओं का विस्तृत विश्लेषण शामिल है।

पारिवारिक कानूनों पर रहा फोकस

कमेटी ने प्रस्तावित यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) के दायरे से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखने की सिफारिश की है। समिति को मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए, शादी, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विभिन्न व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनी ढांचे का अध्ययन करने का काम सौंपा गया था। (भाषांतर: Ravi Pandey | इनपुट: ANI)

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