मध्य प्रदेश में गरीब लोगों को निशाना बनाकर किया गया बीमा घोटाला उजागर
उज्जैन। मध्य प्रदेश में एक बड़ा बीमा घोटाला सामने आया है, जहां गुजरात और मप्र के एजेंटों पर आरोप है कि उन्होंने गंभीर रूप से बीमार या मौत के करीब पहुंचे गरीब मजदूरों और किसानों को निशाना बनाया। जांचकर्ताओं के अनुसार, लोगों की मौत से ठीक पहले और कुछ मामलों में मौत के बाद भी लाखों रुपये की बीमा पॉलिसियां जारी की गईं। बाद में मौत को प्राकृतिक बताकर करोड़ों रुपये का क्लेम लेने की कोशिश की गई।
8 करोड़ का घोटाला उजागर
उज्जैन की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अब तक करीब ₹8 करोड़ के घोटाले का खुलासा किया है। जांच में पाया गया कि ICICI Prudential Life Insurance की पॉलिसियां मृत लोगों और अंतिम अवस्था के मरीजों के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए जारी की गईं। इस मामले में सरपंचों, पंचायत सचिवों और बीमा एजेंटों समेत 39 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
इंदौर में भी फर्जीवाड़ा
केवल उज्जैन में ऐसे 27 मामले सामने आए। इसके अलावा इंदौर जिले के हतोद, सांवेर और बेटमा में पांच-पांच मामले, ग्वालियर, भिंड और मुरैना में 22 मामले तथा छिंदवाड़ा में पांच मामले सामने आए हैं। इन मामलों में पुलिस को शिकायतें दी गई हैं, हालांकि अभी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। जांचकर्ताओं का अनुमान है कि पूरे मध्य प्रदेश में ₹16 करोड़ से अधिक के फर्जी बीमा क्लेम तैयार किए जा रहे थे।
उज्जैन में एफआईआर दर्ज
EOW उज्जैन के एसपी समर वर्मा ने पुष्टि की कि उज्जैन मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। जांच अधिकारी रीमा यादव ने बताया कि शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं और वडोदरा के एजेंटों के नाम भी सामने आए हैं। केवल उज्जैन में ही ऐसे 27 मामले मिले हैं।
कथित धोखाधड़ी का तरीका
एजेंट गांव-गांव जाकर ऐसे गरीब और गंभीर रूप से बीमार लोगों की तलाश करते थे जो जीवन के अंतिम चरण में हों। बीमा एजेंट परिवारों से सीधे या फोन पर संपर्क कर आर्थिक सहायता का लालच देते थे और दस्तावेज जुटाते थे। व्यक्ति की बीमारी छिपाकर पॉलिसियां जारी कर दी जाती थीं। कई मामलों में दर्ज मोबाइल नंबर परिवार के सदस्यों का भी नहीं था। बीमित व्यक्ति की मौत के बाद एजेंट परिवारों को खास तारीख वाले मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए राजी करते थे, जो अक्सर पंचायतों के जरिए तैयार कराए जाते थे। इसके बाद मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों के आधार पर क्लेम दाखिल किए जाते थे और मौत को प्राकृतिक बताया जाता था। लगभग 70% मामलों में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। क्लेम राशि खाते में आते ही तुरंत निकाल ली जाती थी।
मौत के बाद ₹25 लाख की पॉलिसी लेने का आरोप
उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के धुरेरी गांव निवासी धर्मेंद्र सिंह की 2023 में मौत हो गई थी। जांचकर्ताओं का आरोप है कि उसी वर्ष उनके नाम पर ₹25 लाख की बीमा पॉलिसी जारी की गई, जिसकी छह महीने की प्रीमियम राशि लगभग ₹80,000 थी। बाद में 2024 के मृत्यु प्रमाणपत्र के आधार पर क्लेम लेने की कोशिश की गई। धर्मेंद्र के भाई ने बताया कि एक एजेंट ने परिवार से संपर्क कर कहा था कि पॉलिसी जारी होने पर उन्हें ₹4-5 लाख मिलेंगे। एजेंट ने सभी जरूरी दस्तावेज ले लिए। धर्मेंद्र की मौत के बाद एजेंट ने फिर संपर्क कर मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने को कहा। परिवार का कहना है कि उन्हें इतनी बड़ी प्रीमियम राशि की जानकारी नहीं थी। उनके पास केवल दो बीघा जमीन है और सालाना आय लगभग ₹1-1.5 लाख है।
मौत के 21 दिन बाद जारी हुई पॉलिसी
एक अन्य मामले में घट्टिया तहसील के उज्जैयिनी गांव की जयकुंवर की 2023 में मौत हो चुकी थी, लेकिन 2024 में उनके नाम पर बीमा पॉलिसी जारी किए जाने का आरोप है। उनके पति विजय सिंह मजदूरी करते हैं, जबकि पॉलिसी की प्रीमियम राशि ₹44,500 थी, जो परिवार की आर्थिक स्थिति से कहीं अधिक थी। जांचकर्ताओं को इस मामले में जमा किया गया मृत्यु प्रमाणपत्र फर्जी मिला, हालांकि सरपंच और सचिव ने आरोपों से इनकार किया है। इसी तरह पनवासा निवासी दिनेश मालवीय की मौत के 21 दिन बाद उनके नाम पर पॉलिसी जारी करने का आरोप है। दिनेश मजदूर थे, लेकिन पॉलिसी की छह महीने की प्रीमियम राशि ₹49,000 थी।
क्लेम के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र का इस्तेमाल
महिदपुर तहसील के अलाखेड़ा गांव निवासी बालू सिंह ने 2023 में बीमा पॉलिसी खरीदी थी और 64 दिन बाद उनकी मौत हो गई। प्रीमियम ₹36,576 थी। जांचकर्ताओं का आरोप है कि क्लेम प्रक्रिया के लिए बाद में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र जमा किया गया। गांव के सरपंच और सचिव भी आरोपियों में शामिल हैं।
पंचायत अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इस घोटाले ने स्थानीय अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नियमों के अनुसार, मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने से पहले पंचायत सचिवों को मौके पर जाकर सत्यापन करना होता है। लेकिन जांचकर्ताओं का आरोप है कि बैकडेटेड एंट्री करके फर्जी प्रमाणपत्र बनाए गए और मौतों को सामान्य हार्ट अटैक बताया गया। उज्जैन एफआईआर में जिन लोगों के नाम शामिल हैं उनमें अलाखेड़ा के सरपंच जसवंत सिंह, सचिव राजकुमार देवड़ा, सहायक सचिव राधेश्याम गुर्जर, पलखंडा पंचायत सचिव मेंबर चौधरी और धुरेरी पंचायत सचिव लखन चौहान शामिल हैं।
एफआईआर दर्ज, जांच जारी
ICICI Prudential Life Insurance में एमपी-सीजी के रिस्क मैनेजर ऋतिक सोनी ने कहा: फर्जी बीमा क्लेम उठाए जा रहे थे। हमने शिकायत दर्ज कराई और अब उज्जैन में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। अन्य स्थानों पर भी जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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