मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, अब खाली पड़ी सरकारी जमीन उद्योगों के आएगी काम
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने अब प्रदेश में वर्षों से खाली पड़ी और अनुपयोगी सरकारी भूमि को बेचने के बजाय, उसे उद्योगों की स्थापना के लिए निवेशकों को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
जमीन का होगा बेहतर उपयोग
अब तक जो सरकारी जमीनें लंबे समय से खाली पड़ी थीं और जिनका कोई उपयोग नहीं हो रहा था, उन्हें सरकार अब निजी क्षेत्र को सौंपेगी ताकि वहां उद्योग स्थापित किए जा सकें। यह कदम राज्य में निवेश को आकर्षित करने और औद्योगिक वातावरण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
युवाओं को मिलेगें रोजगार के नए अवसर
उद्योगों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार ने इस नई नीति को धरातल पर उतारने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। संबंधित विभागों को खाली जमीनों की पहचान करने और उन्हें औद्योगिक उपयोग के लिए विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ईज आफ डूइंग बिजनेस में होगा सुधार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) में सुधार होगा। खाली पड़ी अनुपयोगी जमीन को औद्योगिक केंद्र के रूप में तब्दील करने से न केवल भूमि का सदुपयोग होगा, बल्कि राज्य को औद्योगिक हब के रूप में नई पहचान मिलेगी।
मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाती है
यह निर्णय मुख्यमंत्री मोहन यादव की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत वे मध्य प्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आने वाले समय में, इस नीति के तहत नई फैक्ट्रियां और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा सकता है।
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